G NEWS 24 : ईरान संकट के बीच UAE को भारत के हथियारों का सहारा !

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज में दिलचस्पी दिखाई...

ईरान संकट के बीच UAE को भारत के हथियारों का सहारा !

भारत और संयुक्त अरब अमीरात एक बड़ी रक्षा डील पर बातचीत कर रहे हैं. माना जा रहा है कि अगर यह डील होती है, तो तो UAE भारत के सबसे ज्यादा मांग वाले मिलिट्री एक्सपोर्ट्स का नया इंटरनेशनल ग्राहक बन जाएगा. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत और UAE के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और आकाशतीर एयर डिफेंस नेटवर्क को लेकर एक बड़ी डील पर बात चल रही है. इस डील के पूरा होने के बाद फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया के बाद UAE ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदने वाला चौथा विदेशी देश बन जाएगा. बता दें कि भारत और रूस की ओर से संयुक्त रूप से विकसित की गई ब्रह्मोस को दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल माना जाता है. भारत और यूएई के बीच बातचीत अभी शुरुआती चरणों में है. हालांकि, यह बातचीत काफी तेजी से आगे बढ़ रही है. 

माना जा रहा है कि पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं को देखते हुए यूएई अपनी सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत बनाने की कोशिश में है. इस पूरे मामले की सीधी जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने रॉयटर्स से बताया कि UAE ने ब्रह्मोस और आकाशतीर सहित हमारे कई हथियार सिस्टम में दिलचस्पी दिखाई है. भारत और UAE के बीच बातचीत शुरुआती दौर में है और तेजी से आगे बढ़ रही है. बताया यह भी जा रहा है कि बातचीत में आकाशतीर की संभावित बिक्री भी शामिल है, जो भारतीय सेना और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) की ओर से विकसित की गई भारत की स्वदेशी ऑटोमेटेड एयर डिफेंस कमांड और कंट्रोल सिस्टम है. हालांकि, इस बात पर भी गौर किया जाना चाहिए कि इस बातचीत को लेकर न को भारत और न ही यूएई के विदेश मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान दिया गया है. 

ध्यान देने वाली बात है कि संयुक्त अरब अमीराक की यह दिलचस्पी ऐसे समय पर सामने आई है, जब पश्चिम एशिया में हालात तनावपूर्ण हो चुके हैं. माना जा रहा है कि यूएई होर्मुज स्ट्रेट के आसपास सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में कई कड़े कदम उठाने की कोशिश में है. चूंकि, होर्मुज स्ट्रेट वैश्विस ऊर्जा निर्यात के लिए एक अहम रास्ता है और दुनिया का कम से कम 20 प्रतिशत ऊर्जा का निर्यात इसी संकरे रास्ते से होता है. यूएई के साथ शुरू हुई रक्षा समझौते की बातचीत को भारत के साथ गहरे होते रिश्ते को दर्शाती है. पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा और रक्षा के क्षेत्र में सहयोग काफी बढ़ा है. इस बात पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस डील को लेकर चर्चा तब की जा रही है, जब भारत रक्षा के क्षेत्र में तेजी से निर्यात बढ़ा रहा है. आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2026 में खत्म हुए वित्तीय वर्ष में भारत का रक्षा निर्यात $4 बिलियन के करीब पहुंचा है. 

जबकि  2013-14 में यह सिर्फ $7.26 मिलियन था. गौरतलब है कि ब्रह्मोस को जमीन, समुद्र और हवा से लॉन्च किया जा सकता है. यह क्रूज मिसाइल सुपरसोनिक गति से टारगेट पर हमला करने में सक्षम है. अगर भारत के साथ UEA की डील होती है, तो भारत को इसकी बिक्री के लिए रूस की अनुमति लेनी होगी. ऐसा इसलिए क्योंकि इस मिसाइल को दोनों देशों ने मिलकर बनाया है.  एक सूत्र ने दावा किया है कि रूस और यूएएई के बीच काफी करीबी वाले संबंध हैं, ऐसे में भारत से हो रही डील को लेकर कोई भी बाधा आने की संभावना नहीं है. पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने ब्रह्मोस (BrahMos) का सफल इस्तेमाल किया. यही कारण है कि इस क्रूज मिसाइल पर दुनिया भर के देशों की दिलचस्पी बढ़ी है. वियतनाम और इंडोनेशिया के अलावा, थाईलैंड, दक्षिण अफ़्रीका, ब्राजील और चिली जैसे देशों ने भी इस हथियार को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है.

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