शीतला सप्तमी पूजा विधि और शुभ मुहूर्त...
देशभर में आज शीतला सप्तमी (बसोड़ा पूजा),मनाई जा रही है !
चैत्र माह की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि देवी शीतला को समर्पित है। हर इस दिन शीतला सप्तमी मनाया जाता है। इस दिन व्रत रखने और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से मां शीतला की विशेष कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शीतला सप्तमी की पूजा करने से माता रानी चर्म रोग, चेचक जैसी बीमारियों से भक्तों की रक्षा करती हैं। इस साल शीतला सप्तमी का व्रत आज यानी 10 मार्च को रखा जाएगा। तो चलिए जानते हैं शीतला सप्तमी पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में।
शीतला सप्तमी 2026 पूजा शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि का आरंभ 9 मार्च रात 11 बजकर 27 मिनट पर हो चुका है। सप्तमी तिथि का समापन 11 मार्च को देर रात 1 बजकर 54 मिनट पर होगा। शीतला सप्तमी की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 37 मिनट से शाम 6 बजकर 26 मिनट तक रहेगा।
शीतला सप्तमी की पूजा विधि...
- शीतला सप्तमी के दिन प्रात:काल उठकर स्नान आदि कर लें और फिर साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
- इसके बाद मंदिर या पूजा स्थल को साफ कर गंगाजल छिड़कर शुद्ध कर लें।
- अब एक चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर शीतला माता की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- माता रानी की मूर्ति के सामने दीया जलाएं।
- इसके बाद फूल, अक्षत, जल और दक्षिणा लेकर व्रत का संकल्प लें।
- अब शीतला माता को लाल फूल, रोली, लाल फूल और अक्षत अर्पित कर धूप-दीप जलाएं।
- शीतला सप्तमी के दिन शीतला स्त्रोत का पाठ भी जरूर करें।
- इसके बाद शीताल माता की आरती करें।
- फिर षष्ठी तिथि में तैयार किया गया प्रसाद का शीतला माता को भोग लगाएं।
शीतला माता को लगाया जाता है बासी भोजन का भोग...
शीतला सप्तमी के दिन देवी मां को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है, जिसे एक दिन पहले ही रात में तैयार कर लिया जाता है। माना जाता है कि शीतला माता को ठंडी चीजें प्रिय है इसलिए उन्हें बासी भोजन का भोग लगाते हैं। वहीं आपको बता दें कि शीतला अष्टमी 11 मार्च को मनाई जाएगी। अधिकतर लोग शीतला अष्टमी का व्रत रखते हैं। तो जो लोग अष्टमी की पूजा करेंगे वो आज यानी सप्तमी के दिन ही प्रसाद बनाकर रख लेंगे। शीतला सप्तमी को बसोड़ा पूजा के नाम से भी जाना जाता है।










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