G News 24 : ग्वालियर वन क्षेत्र में मालिकाना हक वाले विवाद पर 'बरा' की 198 बीघा वन भूमि पर हाईकोर्ट का 'स्टे' !

 गुप्तेश्वर सोसायटी की पुनर्विचार याचिका पर अदालत ने दिए यथास्थिति के आदेश...

ग्वालियर वन क्षेत्र में मालिकाना हक वाले विवाद पर 'बरा' की 198 बीघा वन भूमि पर हाईकोर्ट का 'स्टे' !

ग्वालियर ग्वालियर नगर निगम सीमा के अंतर्गत आने वाले ग्राम बरा की 198 बीघा बेशकीमती जमीन के मालिकाना हक की कानूनी लड़ाई अब एक नए पड़ाव पर पहुँच गई है। माननीय उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने गुप्तेश्वर गृह निर्माण सहकारी संस्था के पक्ष में पूर्व में आए फैसले के अमल पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी है। शासन की पुनर्विचार याचिका पर आए इस आदेश ने फिलहाल उस भूमि को सुरक्षित कर दिया है जिसे वन विभाग अपनी आरक्षित संपत्ति (कंपार्टमेंट नंबर 320) बता रहा है।

बाजार दर और सरकारी रिकॉर्ड का पेच

ग्राम बरा की भौगोलिक स्थिति और शहर से इसकी निकटता के कारण इस 198 बीघा जमीन की कीमत अरबों रुपये आंकी जा रही है। हालांकि, कागजों में यह लड़ाई 'कीमत' की नहीं बल्कि 'टाइटल' (मालिकाना हक) की है।

शासन का पक्ष: सरकारी अभिलेखों और पुराने राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह भूमि 'जंगल और पहाड़' के रूप में दर्ज है।

संस्था का दावा: गुप्तेश्वर सोसायटी का पक्ष 1964 की उन रजिस्ट्रियों पर टिका है, जिन्हें पूर्व में ट्रायल कोर्ट ने संदेहास्पद माना था।

न्यायालय ने क्यों लगाई रोक?

शासकीय अधिवक्ता सीपी सिंह ने मजबूती से पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि पिछले आदेश के दौरान कुछ ऐसे अनिवार्य साक्ष्यों और प्रक्रियागत तथ्यों की अनदेखी हुई थी, जो इस जमीन के शासकीय स्वरूप को सिद्ध करते हैं। कोर्ट ने इन दलीलों को विचारणीय मानते हुए दस्तावेजों की पुनः समीक्षा (Review) करने का निर्णय लिया है।

सस्पेंस अब भी बरकरार

देखा जाए तो यह मामला केवल एक 'स्टे' तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि यदि जमीन सरकारी रिकॉर्ड में 'जंगल' थी, तो दशकों पहले इसकी निजी रजिस्ट्रियां कैसे संभव हुईं? कोर्ट का यह स्टे अब उन सभी पुराने दस्तावेजों की 'सर्जरी' करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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