मध्य प्रदेश राज्य में निर्वाचन के क्षेत्र में नया नवाचार...
राजस्थान के स्थानीय निर्वाचन की भी जिम्मेदारी,अब मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग निभाएगा !
भोपाल। मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग स्थानीय निर्वाचन निकायों के निर्वाचन के क्षेत्र में लगातार कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग जहां मध्य प्रदेश राज्य में निर्वाचन की क्षेत्र में नए-नए नवाचार कर रहा है एवं आधुनिक तकनीक का उपयोग करके निष्पक्ष और पारदर्शी निर्वाचन प्रक्रिया को बढ़ावा दे रहा है वहीं अपनी ईवीएम मशीन एवं नई तकनीक को अन्य राज्यों के साथ शेयरिंग पॉलिसी बनाकर शेयरिंग करके अन्य राज्य के निष्पक्ष एवं पारदर्शी निर्वाचन प्रक्रिया को भी बढ़ावा दे रहा है। मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग इसके लिए न केवल अपने आयोग की ईवीएम मशीन एवं अन्य नई तकनीक प्रदान कर रहा है वहीं पर अन्य राज्यों के निष्पक्ष निर्वाचन के लिए अपने कर्मचारियों अधिकारियों को भेज कर उनका प्रशिक्षण भी करवा रहा है।
मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के द्वारा राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग को 30,000 कंट्रोल यूनिट एवं 60,000 वैलिड यूनिट को लोन बेस पर किराए पर 4 महीने की की अवधि के लिए वहां के स्थानीय निर्वाचन ईवीएम मशीनों से करवाने के लिए प्रदान करने के लियॆ जयपुर राजस्थान में आयोजित कार्यक्रम में M.O.U. संपादित किया गया है।* इसके लिए राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग के द्वारा मध्य प्रदेश राज्य को लगभग 3 करोड रुपए की राशि भी राजस्व प्रदान किया गया है। यह एम ओ यू जयपुर राजस्थान में राज्य निर्वाचन आयोग राजस्थान के मुख्यालय पर आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव, सचिव दीपक सिंह एवं राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त राजेश्वर सिंह वहां के सचिव राजेश वर्मा एवं अन्य अधिकारी कर्मचारी की उपस्थिति में किया गया है।
इस मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की इस शेयरिंग पॉलिसी से न केवल राज्यों के मध्य में आपसी सहयोग की भावना भी विकसित हो रही है वहीं पर मध्य प्रदेश राज्य के राजकीय कोष में भी राजस्व की भी प्राप्ति हो रही है। इसी के साथ ही देश सभी राज्यों में शत प्रतिशत निर्वाचन ई वी एम के माध्यम से करवाने का भी रास्ता खुल रहा है। वहीं पर नई ईवीएम मशीन खरीदने में राज्यों की फंड की भी बचत हो रही है। *मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की इस पहल से देश के लगभग 1000 से 1500 करोड रुपए की राजस्व बचत भी हो रही है।










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