G News24: रफ्तार का रौद्र रूप,सड़कें बनीं आम नागरिकों का काल !

यह केवल ट्रैफिक का मुद्दा नहीं, यह आम नागरिक के जीवन के अधिकार का प्रश्न है...

रफ्तार का रौद्र रूप,सड़कें बनीं आम नागरिकों का काल !

देश आज चौड़ी, चमचमाती और विश्वस्तरीय सड़कों के निर्माण पर गर्व करता है। एक्सप्रेस-वे, फ्लाईओवर और हाई-स्पीड कॉरिडोर विकास की पहचान माने जा रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन सड़कों पर दौड़ती बेतहाशा रफ्तार भी विकास का ही प्रतीक है?

आज हालात यह हैं कि लग्जरी गाड़ियों की रफ्तार आम नागरिकों की जान पर भारी पड़ रही है। करोड़ों की कारों में सवार कुछ रईस और प्रभावशाली लोग सड़क को अपनी निजी संपत्ति समझ बैठे हैं। नियमों की धज्जियाँ उड़ती हैं, सिग्नल टूटते हैं, और इनकी लापरवाही का नतीजा ये होता है कि किसी का भाई,किसी का पिता और किसी का बेटा या बेटी और कभी कभी तो पूरा परिवार ही अपनी जान गंवा देता है। 

लचीला कानून, कमजोर सजा

देश में मोटर व्हीकल एक्ट और आपराधिक कानून मौजूद हैं, परंतु उनकी कठोरता सड़क पर क्यों नहीं दिखती? कई मामलों में प्रभावशाली आरोपी जमानत पर छूट जाते हैं, केस वर्षों तक चलता रहता है और पीड़ित परिवार न्याय की बाट जोहता रह जाता है।

जब तक सड़क हादसों को केवल “दुर्घटना” कहकर टाल दिया जाएगा और इसे “गैर-इरादतन” की आड़ में हल्का अपराध माना जाएगा, तब तक यह सिलसिला थमने वाला नहीं। सवाल यह है कि क्या जानबूझकर तेज रफ्तार में गाड़ी दौड़ाना हत्या के प्रयास से कम है?

बढ़ते हादसे, घटती संवेदनशीलता

राष्ट्रीय स्तर पर हर वर्ष लाखों सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं। इनमें बड़ी संख्या तेज रफ्तार और लापरवाही से जुड़ी होती है। मगर आंकड़ों से ज्यादा डरावना है समाज का संवेदनहीन होता रवैया। एक-दो दिन मीडिया की सुर्खियाँ बनती हैं, फिर सब सामान्य हो जाता है।

जरूरी है कठोरता और जवाबदेही

  • अब वक्त आ गया है कि तेज रफ्तार और लापरवाही से हुई मौत को गंभीर दंडनीय अपराध माना जाए।
  • लग्जरी और हाई-पावर वाहनों के लिए विशेष लाइसेंसिंग और सख्त ट्रैकिंग व्यवस्था हो।
  • दोषी चालक की संपत्ति से पीड़ित परिवार को तत्काल और पर्याप्त मुआवजा मिले।
  • प्रभावशाली लोगों के लिए “विशेष छूट” की परंपरा समाप्त हो।

सड़क विकास बनाम मानव जीवन

सड़कें विकास का प्रतीक तभी हैं जब वे जीवन सुरक्षित रखें। अगर वही सड़कें आम नागरिकों के लिए काल बन जाएँ, तो यह विकास नहीं, विनाश है। सरकार, प्रशासन और न्याय व्यवस्था को यह तय करना होगा कि देश में रफ्तार बड़ी है या इंसान की जान?

आज आवश्यकता केवल चौड़ी सड़कों की नहीं, बल्कि मजबूत कानून और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति की है। क्योंकि जब तक सजा का डर नहीं होगा, तब तक रफ्तार का यह रौद्र रूप थमने वाला नहीं-रामवीर यादव (रवि)

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