महाशिवरात्रि पर सर्वार्थसिद्धि योग का दुर्लभ संयोग...
भगवान शिव की उपासना से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं,जीवन की बाधाएं दूर होती हैं !
महाशिवरात्रि 2026 का पर्व इस बार विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ योग में भगवान शिव की उपासना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि पर रात्रि के चारों पहरों में शिव पूजा का खास महत्व बताया गया है. श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल व बेलपत्र अर्पित करते हैं. साथ ही मंत्र जाप, आरती और रुद्राभिषेक कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
शिवरात्रि 12 शुभ योग और 4 राजयोग एक साथ रहेंगे...
इस शिवरात्रि 12 शुभ योग और 4 राजयोग एक साथ रहेंगे। ऐसे में इस दिन शिव की पूजा से विशेष शुभ फलों की प्राप्ति होगी। इस दिन पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त रात 12:09 से देर रात 01:01 बजे तक रहेगा। यहां आप जानेंगे महाशिवरात्रि 2026 से जुड़ी हर एक जानकारी- जैसे पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, कथा, आरती, चालीसा, भजन इत्यादि।
मान्यता है कि चारों पहर अलग-अलग शुभ मुहूर्त में की गई पूजा कई गुना फलदायी होती है. महाशिवरात्रि पर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और शिव आरती का पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है तथा सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है. विशेष रूप से सर्वार्थसिद्धि योग में की गई साधना को अत्यंत शुभ और सिद्धिदायक माना गया है.
महाशिवरात्रि व्रत में क्या खाएं? जानिए सात्विक आहार की पूरी सूची...
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर व्रत रखने वाले श्रद्धालु सात्विक और फलाहारी भोजन का सेवन करते हैं. इस दिन सूखे मेवे, साबूदाने की खीर और खिचड़ी, सिंघाड़े के आटे की पूरी व हलवा, कुट्टू के आटे की पूरी और चीला, समा के चावल, शकरकंद, आलू, कद्दू की सब्जी, लौकी की सब्जी व हलवा, मखाने की खीर, दही और दूध का सेवन किया जा सकता है. इसके अलावा देसी घी, गुड़, घर के मसाले, सेंधा नमक, पानी और नींबू पानी भी व्रत के दौरान ग्रहण किए जा सकते हैं.
शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक !
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है. धार्मिक मान्यताओं और शिव पुराण के अनुसार, शिवलिंग पर कभी भी खड़े होकर जल अर्पण नहीं करना चाहिए. श्रद्धालुओं को बैठकर, श्रद्धा और मंत्रोच्चार के साथ जल चढ़ाना चाहिए. कहा जाता है कि विधि-विधान से की गई पूजा ही पूर्ण फलदायी होती है, जबकि खड़े होकर जल अर्पित करने से पूजा का पूरा फल प्राप्त नहीं होता.
जल अर्पित करते समय दिशा का रखें विशेष ध्यान !
महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय दिशा का ध्यान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. शिव पुराण के अनुसार, साधक को दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित नहीं करना चाहिए. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान शिव की बाईं ओर माता पार्वती विराजमान रहती हैं, जिसे उत्तर दिशा माना जाता है. इसलिए भक्तों को उत्तर दिशा की ओर मुख करके ही जल अर्पित करना चाहिए. ऐसा करने से भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है.
महाशिवरात्रि पूजा विधि ...
- महाशिवरात्रि के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। काले रंग के कपड़े न पहनें।
- इसके बाद पूजाघर में दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें।
- बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल, फूल, चंदन, रोली, अबीर इत्यादि से शिव-पार्वती की विधि विधान पूजा करें।
- इसके बाद मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, भांग, धतूरा, चंदन, रोली, अक्षत इत्यादि चीजें चढ़ाएं।
- दिन भर व्रत रहें और जब समय मिले भगवान का ध्यान भी करते रहें।
- दिन में किसी भी समय रुद्राभिषेक भी जरूर कराएं। अगर ये संभव न हो तो शाम में शिवलिंग का खुद ही अभिषेक करें।
- शाम में फिर से भगवान शिव-पार्वती की विधि विधान पूजा करें और उन्हें धतूरा, भांग, बेलपत्र इत्यादि चीजें चढ़ाएं।
- साथ ही महाशिवरात्रि व्रत की कथा भी सुनें और इसके बाद भगवान शिव की कपूर से आरती करें।
- आरती के बाद भोग लगाकर पूजा संपन्न करें।
- संभव हो तो इस दिन रात्रि भर जागरण करें।
इस दिन रात्रि के चारों प्रहर की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है।
महाशिवरात्रि पूजा मंत्र
- ॐ नमः शिवाय
- ॐ ह्रीं ह्रौं नम: शिवाय॥
- ॐ नम: शिवाय शुभं शुभं कुरू कुरू शिवाय नम: ॐ ॥
- ॐ पार्वतीपतये नम:॥
- ॐ पशुपतये नम:॥










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