G News 24 :निगम बजट में करोड़ों की बाजीगरी या आत्मनिर्भरता की ओर कदम,महापौर का 'नो टैक्स' सरप्लस बजट पेश !

 ग्वालियर नगर निगम बजट 2026-27...

निगम बजट में करोड़ों की बाजीगरी या आत्मनिर्भरता की ओर कदम,महापौर का 'नो टैक्स' सरप्लस बजट पेश !

ग्वालियर | ग्वालियर की सियासत में आज का दिन बेहद सरगर्म रहा। नगर निगम परिषद की गहमागहमी भरी बैठक में महापौर डॉ. शोभा सिकरवार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 2348.72 करोड़ रुपये का लेखा-जोखा पेश किया। सभापति मनोज तोमर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में महापौर ने एक सधे हुए राजनेता की तरह 'आम आदमी को राहत और विकास को गति' देने का दावा किया। बजट की सबसे बड़ी सुर्ख़ी यह रही कि चुनावी सुगबुगाहटों के बीच जनता पर कोई नया कर (Tax) नहीं लादा गया है, बल्कि 8 लाख रुपये की शुद्ध आय दिखाकर इसे एक 'मुनाफे' वाला बजट साबित करने की कोशिश की गई है।

आंकड़ों का गणित और सियासी संतुलन !

हालांकि, बजट की गहराई में उतरें तो कुछ पेच भी नजर आते हैं। पिछले साल के 2513 करोड़ रुपये के मुकाबले इस बार का बजट 161 करोड़ रुपये कम रखा गया है। जहाँ सत्ता पक्ष (कांग्रेस) इसे एक 'यथार्थवादी' और पारदर्शी बजट बता रहा है, वहीं मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने इसे 'विकास विरोधी' करार देते हुए घेराबंदी शुरू कर दी है। भाजपा का तर्क है कि बजट का आकार घटना शहर की प्रगति की रफ्तार को थामने जैसा है।

विकास के मोर्चे पर बड़ा दांव !

महापौर ने शहर की बुनियादी जरूरतों पर अपना खजाना खोल दिया है। पानी और सीवर व्यवस्था के लिए, जिसमें बहुप्रतीक्षित चंबल परियोजना और अमृत फेज-2 शामिल हैं, 900 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया गया है। वहीं, शहर के बुनियादी ढांचे और जनकार्यों के लिए 600 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने के लिए केंद्र और राज्य के अनुदानों को मिलाकर 300 करोड़ रुपये का निवेश करने का खाका खींचा गया है, जो शहर की लाइफलाइन को दुरुस्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

आवारा कुत्तों के आतंक से निपटने के लिए 2 करोड़ रुपये !

शहर में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक से निपटने के लिए 2 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान करना महापौर का एक 'मास्टरस्ट्रोक' माना जा रहा है। इसके अलावा, परिषद के भीतर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए उन्होंने मेयर, सभापति और पार्षदों की मौलिक निधि में बढ़ोतरी की घोषणा कर स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी साधने का प्रयास किया है। सौर ऊर्जा (7 करोड़ रुपये) और पीआईयू (50 करोड़ रुपये) जैसे आवंटन आधुनिक ग्वालियर की तस्वीर पेश करते हैं।

आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया !

बजट में खर्चों के साथ-साथ आय के नए स्रोतों पर भी फोकस किया गया है। निगम अब केवल टैक्स पर निर्भर न रहकर हुरावली और सागर ताल जैसे कमर्शियल प्रोजेक्ट्स, संपत्तियों को किराए पर देने, और वेस्ट टू वंडर पार्क जैसे पर्यटन स्थलों से राजस्व जुटाने की तैयारी में है। पीएम ई-बस और आईएसबीटी (ISBT) भी निगम की कमाई के नए जरिए बनेंगे।

डॉ. शोभा सिकरवार का यह बजट एक 'डिप्लोमैटिक दस्तावेज' 

डॉ. शोभा सिकरवार का यह बजट एक 'डिप्लोमैटिक दस्तावेज' है। मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार और ग्वालियर निगम में कांग्रेस की महापौर होने के चलते, यह बजट विकास की दौड़ के साथ-साथ क्रेडिट वॉर (Credit War) का भी हिस्सा है। 'बिना नए टैक्स' के करोड़ों के प्रोजेक्ट्स को जमीन पर उतारना डॉ. सिकरवार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल, ग्वालियर की जनता के लिए यह राहत भरा संकेत है, लेकिन विपक्ष के 'विकास विरोधी' आरोपों की तपिश आने वाले दिनों में परिषद की बैठकों को और गरमाएगी।

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