जनरल नरवणे की किताब पर सस्पेंस बढ़ा !
पब्लिशर ने बोला,हमने अभी किताब छापी ही नहीं, अब 'लीकर' को मिलेगी सजा !!!
जनरल नरवणे की किताब के 'लीकर' को पुलिस ढूंढ रही है. एफआईआर दर्ज कर ली गई. किताब शायद व्हाट्सअप पर भी घूमने लगी है. पब्लिशर ने कहा है कि हमने किताब छापी ही नहीं, जो किताब शेयर कर रहा हम कानूनी कार्रवाई करेंगे. सवाल यह है कि राहुल गांधी के हाथ में फिर किताब कैसे आई?
पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब 'प्रगट' होने का मुद्दा अभी थमा नहीं है. कुछ घंटे पहले सस्पेंस और गहरा गया. दिल्ली पुलिस ने व्हाट्सअप पर कथित तौर पर किताब की पीडीएफ शेयर किए जाने के मामले का संज्ञान लेते हुए केस दर्ज कर लिया. पता चला है कि कुछ वेबसाइट्स पर भी जनरल नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ आ गई है. कुछ देर बाद रात में ही पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि जनरल नरवणे के संस्मरण का पब्लिशिंग राइट हमारे पास है लेकिन हम साफ कर देना चाहते हैं कि किताब अभी पब्लिकेशन में गई ही नहीं है.
जी हां, पब्लिशर ने साफ कहा है कि किताब की एक भी कॉपी प्रिंट या डिजिटल रूप में पब्लिश नहीं की गई है, ना ही इसे बांटा, बेचा या जनता में सार्वजनिक किया गया है. सोशल मीडिया पर जानकारी दी गई कि किताब की कोई भी कॉपी जो अभी सर्कुलेशन में है (पूरी हो या आधी) प्रिंट, डिजिटल, पीडीएफ या किसी दूसरे फॉर्मेट में, ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी भी प्लेटफॉर्म पर... यह साफ तौर पर Penguin Random House India के कॉपीराइट का उल्लंघन है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए. पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया किताब के गैर-कानूनी और बिना इजाजत के बांटे जाने के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा.
फिर राहुल को किताब कैसे मिली?
हां, कुछ दिन पहले ही जनरल नरवणे की तस्वीर वाली जिल्द लगी किताब लेकर राहुल गांधी संसद पहुंच गए थे. उन्होंने मीडिया को दिखाते हुए कहा था कि सरकार कह रही है कि यह किताब अस्तित्व में ही नहीं है, ये देखिए. राहुल कथित तौर पर किताब के हवाले से दावा कर रहे हैं कि 2020 में भारत और चीन की सेना के बीच लद्दाख में हुई झड़प के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई.
अब पब्लिशर ने कहा है कि किताब छपी ही नहीं तो यह राहुल गांधी के हाथ में कहां से प्रगट हो गई. क्या किसी ने लीक की? आम प्रक्रिया यह है कि जब कोई पूर्व सैन्य अधिकारी किताब लिखता है तो उसकी मैनुस्क्रिप्ट रक्षा मंत्रालय की समीक्षा के बाद ही पब्लिशिंग के लिए जाती है. अभी इस किताब को मंजूरी नहीं मिली है फिर किसने इसे लीक कर दिया.
सैन्य अफसरों के लिए क्या है नियम
गुप्त जानकारी रखने वाले वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ऑफिशियल्स सीक्रेट्स एक्ट के बंधन में बंधे होते हैं. ये रिटायरमेंट के बाद भी कोई गुप्त जानकारी पब्लिक में सार्वजनिक नहीं कर सकते हैं. कुछ भी पब्लिश करवाने से पहले सरकार की मंजूरी की जरूरत होती है. मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि इस किताब में गलवान झड़प और अग्निपथ योजना को लेकर कुछ संवेदनशील जानकारी है जिसके कारण रक्षा मंत्रालय से क्लियरेंस नहीं मिल रहा है.
बिना पब्लिश किताब लीक करने की सजा
कॉपीराइट एक्ट के तहत छह महीने से लेकर तीन साल की सजा और 50 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. अगर किताब ईमेल, व्हाट्सअप, वेबसाइट आदि पर लीक गई है तो यह मामला आईटी एक्ट के भी दायरे में आएगा और 3 साल तक की सजा या 2 लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों हो सकता है.
एक-एक की तलाशी लेगी दिल्ली पुलिस; राहुल गांधी तक पहुंचेगी जांच
किताब के लीक होने का मामला दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल तक पहुंच गया है. दिल्ली पुलिस 'ऑपरेशन फोर स्टार्स' के जरिए यह पता लगाएगी कि आखिर एमएम नरवणे की किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' भारत में लोगों के हाथों तक कैसे पहुंची? यह कहां छपी? किसने छापनी और कैसे इसे सोशल मीडिया में वायरल किया गया? बता दें कि यह जांच कांग्रेस नेता राहुल गांधी के घर तक भी पहुंचेगी. राहुल गांधी ने ही सदन में पूर्व आर्मी चीफ के इस किताब के पन्नों को लहराकर सवाल खड़े किए थे. चूंकि यह मामला नेशनल सिक्योरिटी और ऑफीशियल सीक्रेट से संबंधित है ऐसे में इसपर तगड़ा एक्शन होगा.










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