अंदरूनी विवाद और वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफों के बावजूद ...
महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में ओवैसी की पार्टी AIMIM ने राज्य भर में पार्टी ने जीतीं 126 सीटें !
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अंदरूनी विवाद और वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफों के बावजूद महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया. पार्टी ने छत्रपति संभाजीनगर में 33 सीटें जीतकर पिछली बार की 24 सीटों से ज्यादा सीटें हासिल की. राज्य स्तर पर AIMIM ने कुल 126 सीटें हासिल कीं, जिसमें मालेगांव, नांदेड़, अमरावती, धुले, सोलापुर, मुंबई और अन्य शहर शामिल हैं.
AIMIM ने महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया है.
पार्टी का ये प्रदर्शन इसलिए भी खास है क्योंकि पार्टी इस चुनाव के समय अंदरूनी विवाद, टिकट वितरण से जुड़े विरोध और कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफों का सामना कर रही थी. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी ने छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम में 33 सीटें जीतकर पिछली बार के प्रदर्शन (24 सीटें) की तुलना में स्पष्ट उछाल दर्ज किया. राज्य स्तर पर AIMIM ने कुल 126 सीटें जीतीं. इसमें मालेगांव में 21, नांदेड़ वाघाला में 14, अमरावती में 12, धुले में 10, सोलापुर में 8, मुंबई में 8, नागपुर में 6, अकोला में 3, अहिल्यानगर और जालना में 2-2 और ठाणे में 5 सीटें शामिल हैं.
शिवसेना और भाजपा के गढ़ में AIMIM को मिली जीत !
AIMIM प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सांसद सैयद इम्तियाज जलील ने चुनावी नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि AIMIM केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं है. जलील ने बताया कि AIMIM ने टिकट पर हिंदू, SC और ST समुदाय के उम्मीदवार भी उतारे हैं. संभाजीनगर के गुलमंडी वार्ड में चार विजेता उम्मीदवारों में से दो AIMIM के थे, जो पारंपरिक रूप से शिवसेना और बीजेपी का गढ़ माना जाता रहा है.
जलील ने कहा कि AIMIM नागरिकों के हित में उठाए जाने वाले कदमों का समर्थन करेगी. उनका मानना है कि पार्टी का यह प्रदर्शन उस अंदरूनी कलह के बावजूद महत्वपूर्ण है, जो 2015 में संभाजीनगर से 24 पार्षदों में से 21 को हटाए जाने के बाद शुरू हुआ था. उस समय नाराज नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किए और पार्टी की नेतृत्व को हस्तक्षेप करना पड़ा.
AIMIM के इस प्रदर्शन से साफ है कि पार्टी ने महाराष्ट्र के शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और अंदरूनी मतभेदों के बावजूद मतदाताओं के बीच प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है. इस बीच आपको बता दें कि इस चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा. संभाजीनगर में कांग्रेस ने 71 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन केवल मलेका हबीब कुरैशी अपनी सीट बचा सकीं. कांग्रेस ने 2015 में 11 सीटें जीती थीं. विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस की हार का कारण खराब योजना और खुद को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के विकल्प के तौर पर पेश करने में असफलता है.










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