दान में मिलने वाले कंबल,शाल, स्वेटरआदि के लालच में जमे ये भिखारी कहीं यह अपराधी तो नहीं...
महानगर में एका-एक बडी संख्या में भिखारियों की मंदिरों,रेलवे पुलआदि पर बढ़ गई तादात !
ग्वालियर। ग्वालियर में ठंड ने अपना प्रकोप लोगों को दिखाना शुरू कर दिया है। वहीं दूसरी ओर महानगर में एक जनवरी के बाद से बडी संख्या में भिखारियों ने मंदिरों से लेकर रेलवे पुलों पर अपना कब्जा जमा लिया है। भिखारियों का मानना है कि महानगर के दान दाता उन्हें ठंड के प्रकोप के चलते कंबल , शाल , स्वेटर आदि सामग्री देकर जायें। यह आये नये नवेले भिखारी सिर्फ सामानों के लालच में यहां आकर ठंड में दिख रहे हैं, और ग्वालियर को बदनाम करा रहे हैं कि ग्वालियर में सर्वाधिक भिखारी हैं। यह भी हो सकता है कि कई अपराधी भिखारी वेश में यहां आकर डट गये हों।
ग्वालियर महानगर में जबसे केलैंडर बदला है उसी के बाद से महानगर में भिखारियों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। महानगर के चौराहों, मंदिरों से लेकर रेलवे के दोनों पुलों पर रात को भिखारियों का हुजूम देखा जा सकता है। रात में इन फुटपाथियों को प्रशासन रेन बसेरे में भेज देता है लेकिन मौका मिलते ही ये फिर वापस अपने स्ठान पर वापस आ जाते हैं। भिखारी इस आशा में रेलवे पुलों पर आ बैठते है कि कोई उन्हें ठंड में देखे और ठंड से बचने के लिये कोई समाज सेवी संस्था के साथ आकर उन्हें ठंड के कपडे कंबल, स्वेटर आदि दे जायें।
सूत्र बताते है कि यह भिखारी वर्ष के अंत और जनवरी के पहले दिन कहां से आ गये इसका कोई पता नहीं बता सका है। हां भिखारियों की संख्या में बढोत्तरी जरूर हुई है। कुछ का मानना है कि यह भिखारी माह मेले के लिये देश के कोने कोने से जाने के लिये निकले है और जनवरी के पहले दिन से ग्वालियर में जम गये है।
उधर रेलवे पुल से रोजाना पुलिस बले दिन रात में गश्त से लेकर अपने बिना काम से भी निकलता हुआ जाता है लेकिन किसी पुलिस बल को यह भिखारी नजर नहीं आये ना ही ग्वालियर स्मार्ट सिटी में लगे अत्याधुनिक कैमरों की नजर से भी यह भिखारी अभी तक दूर है। सूत्रों के अनुसार पुलिस भिखारियों द्वारा किसी बडी वारदात को होने के बाद ही जागेगी। स्मार्ट सिटी के कैमरे भी अंधे हैं , उन्हें यह भिखारी नहीं दिख रहे हैं। इन अंधे कैमरों को केवल दो पहिया वाहन चालक या चार पहिया वाहन चालक ही दिखते हैं। ताकि फर्जी चालान बनाये जा सकें।









0 Comments