दोषियों पर देशद्रोह की कार्रवाई की मांग...
बाबा साहब के अपमान के मामले में गांधीवादी संगम ने कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन
ग्वालियर। गांधीवादी संगम द्वारा बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के अपमान के मामले में ग्वालियर संभाग के कमिश्नर को ज्ञापन सौंपते हुए दोषियों के खिलाफ देशद्रोह की धाराओं में सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। ज्ञापन में बताया गया कि दिनांक 31 दिसंबर 2025 की रात्रि लगभग 8 बजे मेला परिसर में आयोजित “गांधी–अंबेडकर प्रदर्शनी” को एसडीएम, पुलिस फोर्स एवं मेला सचिव द्वारा कथित रूप से साजिश के तहत फाड़ा गया। इस प्रदर्शनी में संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, स्वतंत्रता आंदोलन, संविधान के मूल्यों, क्रांतिकारियों और माताओं के योगदान को दर्शाया गया था। गांधीवादी संगम ने इसे संविधान, स्वतंत्रता आंदोलन और महापुरुषों का अपमान बताते हुए कहा कि यह कृत्य देशद्रोह की श्रेणी में आता है।
संगठन ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनी के लिए मेला सचिव को दिनांक 16 दिसंबर 2025 को विधिवत आवेदन दिया गया था, जिसके बाद 27 दिसंबर 2025 को पत्र क्रमांक 2025–26 जारी कर लाइट की अनुमति भी प्रदान की गई थी। यदि प्रशासन को कोई आपत्ति थी तो सूचना या नोटिस दिया जा सकता था, लेकिन इस प्रकार महापुरुषों का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। वहीं दूसरी ओर, 01 जनवरी 2026 को बाबा साहब डॉ. अंबेडकर का पोस्टर जलाने की घटना को भी गंभीर बताते हुए दोषियों पर तत्काल एवं सख्त कार्रवाई की मांग की गई है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
संगठन ने कहा कि सभी महापुरुष देश की अमूल्य धरोहर हैं, जिनका सम्मान हर हाल में किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि “गांधी–अंबेडकर प्रदर्शनी” का उद्घाटन विधिवत रूप से 28 दिसंबर 2025 को किया गया था। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी प्रदर्शनी में आज़ादी का आंदोलन, संविधान में गांधी और अंबेडकर का योगदान, स्वतंत्रता संग्राम में माताओं का योगदान, संविधान निर्माता बाबा साहब से जुड़े फोटो दस्तावेज, बच्चे बचाओ आंदोलन, बेटियों की शिक्षा एवं सुरक्षा, महिलाओं को न्याय, गौमाता संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया था। अंत में गांधीवादी संगम ने प्रशासन से आग्रह किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।









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