चार साहबजादे जिनकी शहादत के आगे मुगल झुके और झुक गया अंबर

 भारत में वीर बाल दिवस सप्ताह में गुंजायमान होगी बाल वीरों की गाथा...

चार साहबजादे जिनकी शहादत के आगे मुगल झुके और झुक गया अंबर

गुरु गोविंदसिंह के खून थे वो, बाबा तेग बहादुर जी के पोते थे वो, शीश कटाना  जानते थे। मुगल झुके, अंबर झुका। शान में उनकी खुद रब झुका। आसमान में चमके बनकर सितारे,चार साहबजादे  वीर हमारे। उपरोक्त पंक्तियां पंजाबी साहित्य अकादमी की निदेशक नीरू सिंह ज्ञानी ने डबरा  में वीर बालक सप्ताह पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। श्रीमती ज्ञानी ने कहा कि मध्य प्रदेश के सभी विद्यार्थी एवं आने वाली पीढ़ी इस अप्रतिम बलिदान से परिचित हो सकें इस निमित्त बाल वीर सप्ताह का आयोजन एक महत्वपूर्ण प्रयास सिद्ध होगा। गुरु गोविंदसिंह के साहिबजादो का बलिदान हिंदुस्तान हमेशा याद रखेगा।

मध्यप्रदेश सरकार ने लोक शिक्षण संचालनालय के माध्यम से विद्यार्थियो के बीच श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी के पूरे परिवार द्वारा दिये गये बलिदान को प्रदेश के विद्यार्थियो के बीच गुँजायमान हो रहा है। उन्होने कहा-शिक्षा का जलाया हुआ दीपक पूरे समाज को रोशन करता है। पंजाबी साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश द्वारा वीर साहिबज़ादों पर केन्द्रित तालगुरू प्रोडक्शन द्वारा तैयार की गई डॉक्यूमेंट्री एवं सिख फाउण्डेशन, नई दिल्ली द्वारा इतिहास लेख को अकादमी द्वारा लोक शिक्षण संचालनालय, को उपलब्ध कराया गया है, जिसका प्रदर्शन प्रदेश भर के 7 हजार से अधिक विद्यालयों में किया जाएगा।

विकासखंड शिक्षा अधिकारी रघुवीर रजक ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव में भारत के गौरवशाली इतिहास को सम्मानित करने का अवसर मिला है। 25 दिसंबर से शीतकालीन अवकाश होने के कारण स्कूल शिक्षा और संस्कृति विभाग के सहयोग से सभी शासकीय, अशासकीय एवं अर्धशासकीय स्कूलों में 19 से 24 दिसंबर तक ष्वीर बाल दिवस सप्ताहष् का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के अध्यक्ष जिला योग प्रभारी दिनेश चाकणकर ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह के वीर पुत्रों ने जिस प्रकार शहादत इस देश की रक्षा के लिए दी ऐसे उदाहरण बिरले ही देखने को मिलते हैं।

भारत के इतिहास में यह सप्ताह 'शोक सप्ताह' होता है !

श्री चाकणकर ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव 21 दिसम्बर से 27 दिसम्बर तक इन्हीं 7 दिनों में गुरु गोविंद सिंह जी का पूरा परिवार शहीद हो गया था। उसी रात माता गूजरी ने भी ठन्डे बुर्ज में प्राण त्याग दिए। यह सप्ताह भारत के इतिहास में 'शोक सप्ताह' होता है, शौर्य का सप्ताह होता है इसलिए यह सप्ताह उन शहीदों को याद करते हुए बितायें।  श्री चाकणकर ने कहा कि भारत के गौरवमयी इतिहास को अँग्रेजों ने अपने हित के लिये तोड़ा मरोड़ा। ऐसा उन्होंने किया वो तो उनकी भलाई में था लेकिन स्वाधीनता के बाद भी हम उसी इतिहास को ढो रहे हैं यह गलत है। इतिहासकारों ने जीता हुआ सिकन्दर तो पढ़ाया लेकिन हारा हुआ सिकन्दर नहीं पढ़ाया। आज के पुण्य दिवस पर हम गुरू गोविन्द सिंह जी के साहबजादों को याद करते हुए उन समस्त बलिदानियों को भी याद करें जिनके बलिदान से इस देश को स्वतंत्रता प्राप्त हुई।

इस अवसर पर आजादी अमृत महोत्सव के सहायक नोडल अधिकारी डॉक्टर पीके दुबौलिया, प्राचार्य मुकेश शर्मा, विकासखंड योग प्रभारी जयदयाल शर्मा, सत्येंद्र सिंह राणा, योग क्लब प्रभारी श्रीमती भारती झा, सुनील झा, विद्यालय के शिक्षक तथा विद्यार्थी उपस्थित थे। इस अवसर पर गुरु गोविंद सिंह साहिबजादों की शहादत पर केंद्रित फिल्म सूरा नो पहचानिए का प्रदर्शन भी किया गया।

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