क्षेत्रीय जन विरोध से हताश प्रद्युम्न सिंह तोमर इस्तीफा देने को तैयार !

सड़क चौड़ीकरण बना ऊर्जा मंत्री के लिए बना सिरदर्द

ग्वालियर। क्षेत्र की सड़कों का चौडीकरण मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह के लिए सर दर्द बन गई है l सड़कों के कारण तोमर मुश्किल में फंस गए हैं। उन्हें अपने ही विधानसभा क्षेत्र में लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के गुस्साए नागरिकों के बीच उन्हें यह भी कहना पड़ा कि आप चाहे तो मुझे जूते मार दें, पत्थर मार लें लेकिन प्रशासन द्वारा की जा रही तोड़फोड़ जनहित में है। 

दरअसल ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र जहां से प्रद्युम्न सिंह तोमर विधायक हैं, विधानसभा क्षेत्र के किला गेट इलाके में सड़क को चौड़ा करने के लिए इन दिनों यहां बने मकानों और दुकानों पर जेसीबी चलाई जा रही है। पिछले तीन दिनों से चल रही तोड़फोड़ की कार्रवाई के बीच आज ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर लोगों के बीच पहुंचे जहां गुस्साए नागरिकों ने उन्हें खरी-खोटी सुनाई। इसी दौरान मंत्री जी को यह कहना पड़ा कि जनता चाहे तो उन्हें जूते मार ले या फिर उनके सर पर पत्थर मार दे। 

यही नहीं इसी मुद्दे पर उनकी विधानसभा क्षेत्र के हजीरा इलाके में स्थित सिविल डिस्पेंसरी में मोतियाबिंद ऑपरेशन के शुभारंभ के मौके पर कार्यक्रम से इतर मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कुछ पत्रकारों से यह भी कहा कि अगर इस मुद्दे पर क्षेत्र की 50 फ़ीसदी जनता कह दे तो मैं इस्तीफा भी देने को तैयार हूं।

  इधर मंत्री जी की मुश्किलें बढ़ रही हैं और उधर कांग्रेस इस मुद्दे पर कोई भी मौका गंवाना नहीं चाहती है। इसीलिए आज कांग्रेस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी बुलाई जिसमें कांग्रेस नेता सुनील शर्मा ने प्रद्युम्न सिंह तोमर को उनका वह वादा याद दिलाया जब उन्होंने 2014 में सड़क चौड़ीकरण कार्य को लेकर कहा था कि वह किला गेट क्षेत्र में एक ईंट भी नहीं खिसकने देंगे। यह बात तब की है जब प्रद्युम्न सिंह तोमर कांग्रेस के विधायक हुआ करते थे। 

कांग्रेस का कहना है कि वह शहर के विकास और सौंदर्यीकरण की विरोधी नहीं है लेकिन लोगों को उजाड़ने से पहले उन्हें विस्थापित किया जाना चाहिए। कांग्रेस नेता सुनील शर्मा ने मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को झूठों का सरदार भी कहा। बहरहाल अब मंत्री प्रद्युम्न सिंह से पूछा जा रहा है कि वह अपना इस्तीफा कब देंगे क्योंकि क्षेत्र की जनता हालिया तोड़फोड़ में काफी कुछ गंवा बैठी है। जिन लोगों के मकान टूटे हैं उनका कहना है कि 24 घंटे के नोटिस पर यह कार्रवाई की गई है।