जानकर इसे अनदेखा किया जा रहा है...?

शहर के बीचों बीच सड़क पर हो रहा अतिक्रमण जिम्मेदारों को दिखाई नहीं दे रहा है !

ग्वालियर l  ग्वालियर में कुछ वर्ष पूर्व तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रपाठी,पी नरहरि और उस समय निगमायुक्त रहे एनव्ही राजपूत एवं निकुंज श्रीवास्तव  के दुवारा सुगम यातायात के लिए सड़कों का चौड़ीकरण कोर्ट के आदेशानुसार करने के मकसद से सड़कों पर से अतिक्रमण हटाने का कार्य किया गया था l इसके साथ साथ सड़कों के बीच बने अनेक धार्मिक स्थल भी हटाए गए थे l उसी के अंतर्गत फालका बाजार स्थित जैन मंदिर और श्री राम मंदिर के पिछले के पिछले हिस्से का कुछ भाग तोड़ दिया गया था l जिससे सड़क कुछ चौड़ी हो गई थी l 


इसी के चलते  यहां से आने जाने वालों को कुछ राहत मिली थी i हालाँकि इस कार्यवाही के दौरान अधिकारियों काफी विरोध भी झेलना पड़ा था लेकिन इन्होने इसकी परवाह न करते हुए अपना कार्य पूरी ईमानदारी व निष्ठां से किया l लेकिन अब पुनः एक बार फिर से देखने में आ रहा है कि जहां - जहां  से ये  अतिक्रमण हटाया गए थे उन्हीं स्थानों पर दोबारा से अतिक्रमण किया जा चुका है निर्मित अभी हाल ही में कुछ दिनों में एक फास्ट फूड कॉर्नर संचालित किया जाने लगा है जो अभी एक अस्थाई अतिक्रमण की शक्ल में है लेकिन यही आने वाले समय में यही फ़ास्ट फूड कॉर्नर पक्की दुकानों की शक्ल ले लेगा l तब तक प्रशासन आँखें मूँद कर देखता रहेगा ! सड़कों से अतिक्रमण तो हटाया जाता है लेकिन फिर उन उन सड़कों का उपयोग लोग वाहन पार्किंग,रेडी ठेले वालों और मेकेनिकों द्वारा घेर कर लोगों को परेशान किया जाता है l  और जिम्मेदारों को ये अतिक्रमण दिखाई नहीं देता l 

ताज्जुब तो इस बात का है कि यहां से दिन में कम से कम दो चार बार तो जिला प्रशासन और नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी निकलते ही होंगे क्या उन्हें यह सरेआम किया गया अतिक्रमण दिखाई नहीं दे रहा है ! या फिर जानकर इसे अनदेखा किया जा रहा है l इसकी वजह से रोड पर भी जाम लगता है क्योंकि यहां से शहर का चारों तरफ का ट्रेफिक गुजरता है । ताज्जुब इस बात का है यह किसके इशारे पर दिन दहाड़े हो रहा है लेकिन किसके इशारे पर और कैसे होने दिया गया है। ये तो सिर्फ एक जगह की रिपोर्ट है l ऐसी तमाम जगह है जहाँ फिर से अतिक्रमण होने की जानकारी हमें प्राप्त हो रही है l अब देखना होगा कि इस खबर के बाद प्रशासन क्या एक्शन लेता है l

इस खबर के माध्यम स पुलिस यह जानना चाहती है कि अतिक्रमण के खिलाफ कार्यवाही न होने पर ऐसा लगता है कि  किया गया अतिक्रमण प्रशासन की नज़रों में जायज़ है, अब सवाल ये उठता है कि यदि ये जायज़ है तो तत्कालीन अधिकारियों द्वारा इसे हटाया क्यों गया था ? और यदि नाजायज़ है तो यह दोबारा क्यों होने दिया गया ?