अगले तीन दिनों में  होगा इसका आदेश जारी …

कार में आगे-पीछे बैठने वाले सभी लोगों को सीट बेल्ट लगाना जरूरी



नई दिल्ली। अब कार में आगे-पीछे बैठने वाले सभी लोगों को सीट बेल्ट लगाना जरूरी हो गया है। बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि कार में सवार सभी लोगों को सीट बेल्ट लगाना जरूरी होगा। गडकरी ने एक कार्यक्रम में साइरस मित्री की कार दुर्घटना में हुई मौत का भी जिक्र किया। गडकरी ने सीट बेल्ट नहीं लगाने पर भारी जुर्माने की बात कही है।

सरकार अगले तीन दिनों में इसका आदेश जारी करेगी। ड्राइविंग सीट पर बैठा शख्स तो पहले भी सीट बेल्ट लगाता था, लेकिन अब पीछे बैठे शख्स को भी उस नियम का पालन करना होगा। ऐसे में ज्यादा सुरक्षा पर जोर दिया जा रहा है जिससे ऐसी सड़क दुर्घटनाओं को कम किया जा सके। बताया जाता है कि अब से कार में पीछे की सीट पर बेल्ट लगाने के लिए क्लिप की व्यवस्था होगी। अगर पीछे बैठा कोई शख्स सीट बेल्ट नहीं लगाता है, तो अलार्म बजता रहेगा। टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की सड़क हादसे में मौत से सबक लेते हुए सरकार ने ये फैसला लिया है। 

साइरस मिस्त्री की रविवार को सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। यह हादसा महाराष्ट्र के पालघर जिले में नेशनल हाइवे पर हुआ था। इसके बाद ही सरकार ने पिछली सीट पर बैठे लोगों के लिए सीट बेल्ट अलर्ट की व्यवस्था शुरू करने का फैसला लिया। बता दें कि केंद्रीय मोटर वाहन नियम (सीएमवीआर) के नियम 138 (3) के तहत पिछली सीट पर सीट बेल्ट नहीं लगाने पर 1,000 रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, ज्यादातर लोग इस बात से अनभिज्ञ हैं कि यह नियम अनिवार्य है। ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी पिछली सीट पर बैठे यात्रियों के सीट बेल्ट नहीं लगाने पर जुर्माना नहीं लगाते हैं। ड्राइवर और अगली सीट पर बैठे यात्री के लिए सीट बेल्ट लगाना 1993 में ही अनिवार्य कर दिया गया था। सरकार ने अक्टूबर 2002 को पिछली सीट पर बैठे यात्रियों के लिए भी सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य कर दिया था, लेकिन इसका सही से पालन नहीं होता है। 

सन 2019 में सरकार ने सीट बेल्ट नहीं लगाने पर जुर्माना बढ़ाकर 1000 रुपए कर दिया था लेकिन इससे भी स्थिति नहीं सुधरी। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में सड़क हादसों में सबसे ज्यादा लोग भारत में मारे जाते हैं। कोरोना महामारी से पहले देश में हर चार मिनट में एक भयानक सड़क हादसा होता था। भारत में दुनिया की सिर्फ एक फीसदी गाड़ियां हैं, लेकिन सड़क हादसों में दुनिया में होने वाली कुल मौतों में 11 फीसदी भारत में होती हैं।