सनातनी हिन्दुओ के पूजा पाठ में केला और नारियल का है खास स्थान …

हिन्दू पूजा में भगवान को  केला और नारियल  अर्पित करने का राज  !


नारियल और केला ये दो ही ऐसे फल है जो किसी के जूठे बीज से उत्पन्न नही होते, मतलब अगर हमे आम का पेड़ लगाना है तो हम आम को खाते है और उसके बीज या गुठली को जमीन में गाड़ते है तो वह पौधे के रूप में उगता है,या फिर ऐसे ही गुठली निकाल के लगा दे तो भी वह उस पेड़ का बीज(जूठा या अंग) ही हुआ, लेकिन केले का या नारियल का पेड़ लगाने को केवल जमीन से निकला हुआ पौधा(ओधी) ही  लगाते है, जो की खुद में ही पूर्ण है,न किसी का बीज न हिस्सा, न जूठा,इसलिए भगवान को सम्पूर्ण फल अर्पित किया जाता है l 

हमारे पूर्वज कितने ज्ञाता थे,जो चीजे हमे आज तक पता नहीं वो पहले से जानते थे और उसका जीवन में इस्तेमाल कर जीवन पध्दति में ढाल लिए थे,जो हमे परंपरा से प्राप्त हुआ है,केवल हम उन्हे इस्तेमाल करते गए पर उनकी क्यों और क्या महत्ता है ये कभी भी जानने की कोशिश नही किये l