नर्सिग कॉलेजों के फर्जीवाड़े में अदालत का बड़ा आदेश…

प्रदेश के 93 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता रद्द !


भोपाल। मध्य प्रदेश में नर्सिग कॉलेजों के फर्जीवाड़े वाले केस में आज अदालत ने बड़ा आदेश दिया। जबलपुर हाईकोर्ट ने नर्सिंग काउंन्सिल की रजिस्ट्रार को निलंबित करने का आदेश दिया है। मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में एडमिशन फर्जीवाड़े से जुड़ी जनहित याचिका पर आज सुनवाई हुई। जबलपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने अपने दायित्वों के निर्वहन में नाफरमानी कर रही नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रार को निलंबित करने का आदेश दिया।निरीक्षण में गंभीर विसंगतियां मिलने और आदेश के बाद भी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध ना कराने के बाद राज्य शासन ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश के 93 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता को निरस्त कर दिया है। इसमें भोपाल के आठ नर्सिंग कॉलेज शामिल हैं। जिन नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता निरस्त की गई है, उसमें भोपाल की आइसेक्ट यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट ऑफ़ नर्सिंग भोपाल, चिरायु कॉलेज ऑफ नर्सिंग, कुशाभाऊ ठाकरे नर्सिंग कॉलेज, कस्तूरबा कॉलेज ऑफ नर्सिंग बीएचईएल के नाम शामिल हैं। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि तत्काल नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रार के स्थान पर प्रशासक नियुक्त किया जाए। और अगले आदेश तक प्रशासक ही नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रार का कार्यभार संभालेगा। 

मध्य प्रदेश में खुले फर्जी नर्सिंग कॉलेजों से संबंधित एक महत्वपूर्ण याचिका लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में दायर की थी। याचिका के माध्यम से बताया गया था कि किस तरीके से नियमों को ताक पर रखते हुए दुकानों, कार शोरूम और ऐसे स्थान जो मापदंडों को पूरा नहीं करते हैं वहां नर्सिंग कॉलेजों को ना केवल खोल दिया गया, बल्कि बाकायदा उन्हें मान्यता भी दे दी गई। जब पूरा मसला हाईकोर्ट पहुंचा तो इसे विस्तार देते हुए हाईकोर्ट ने पूरे मध्यप्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों का विवरण तलब कर लिया।पिछले दिनों से इस पूरे मामले पर सुनवाई जारी थी। नर्सिंग काउंसिल की रजिस्ट्रार जनरल से शपथ पत्र में जवाब मांगा गया था। आज हुई सुनवाई के दौरान नर्सिंग काउंसिल की रजिस्ट्रार सुनीता सिजु ने शपथ पत्र पेश कर जवाब दिया और यह बताया कि 94 नर्सिंग कॉलेजों की अनुमति इस वर्ष नहीं दी गई है। इसके अलावा 93 नर्सिंग कॉलेजों को बिल्डिंग भवन संबंधी नोटिस का जवाब ना देने के कारण उनकी मान्यता निलंबित कर दी गई है। नर्सिंग काउंसिल की रजिस्ट्रार ने यह भी बताया कि जब से याचिका हाईकोर्ट में लंबित है उस दरमियान 49 नए नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता दी गई है। जिन का निरीक्षण भी कर लिया गया है और सत्यापन करने के बाद ही अनुमति जारी की गई है।

रजिस्ट्रार के शपथ पत्र में पेश किए गए जवाब के बाद याचिकाकर्ता ने इसे झूठा बताया और कोर्ट के सामने वो साक्ष्य पेश किए जो बताते हैं कि नर्सिंग कॉलेज गैरकानूनी तरीके से चल रहे हैं। याचिकाकर्ता ने 10 नर्सिंग कॉलेजों का उदाहरण पेश करते हुए बताया कि किस तरह से नर्सिंग कॉलेज शटर वाले भवन में और डुप्लीकेट फैकल्टी के साथ खोले गए हैं। कोर्ट में पेश किए गए तथ्यों और साक्ष्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने ना केवल इस पर बात पर गंभीरता जताई, बल्कि नर्सिंग काउंसिल की रजिस्ट्रार को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दे दिए। पूरे मामले पर अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद तय की गई है।मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने इसको लेकर आदेश जारी कर दिए हैं। विभाग ने कहा है कि नर्सिंग सत्र 2021-22 में जिस किसी भी छात्र का एडमिशन सूची में दिए गए कॉलेज में हो वह अपनी कॉलेज से फीस वापस ले सकते हैं। मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल द्वारा जारी अपने आदेश में कहा है कि उच्च न्यायालय जबलपुर में दायर याचिका में पारित आदेश के निर्देशानुसार जबलपुर, इंदौर क्षेत्र के सत्र 2020-21 में मान्यता प्राप्त नर्सिंग कॉलेजों को अकादमी भवन छात्रावास लैब उपकरण संबंध अस्पताल के समस्त दस्तावेज एवं फोटो और नर्सिंग कॉलेज के अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए समय सीमा निर्धारित की थी।

लेकिन समय सीमा के बीत आने के बाद भी नर्सिंग कॉलेजों द्वारा दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए और ना ही इस तरह की कोई सूचना दी गई। मध्य प्रदेश नर्सिंग शिक्षण संस्था मान्यता नियम 2018 के नियम 7 के अनुसार कार्रवाई करते हुए इन संस्थाओं की शैक्षणिक सत्र 2021-22 की मान्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित की जाती है। गौरतलब है कि देश में गैर कानूनी ढंग से संचालित हो रहे नर्सिंग कॉलेज के मामले में बीते दिन हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए नर्सिंग काउंसिल की रजिस्ट्रार को निलंबित करने के निर्देश दिए थे और नर्सिंग काउंसिल की रजिस्ट्रार का प्रभार प्रशासक को देने का आदेश दिया था। प्रदेश में गैर कानूनी ढंग से संचालित हो रहे नर्सिंग कॉलेजों के मामले में लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन मध्य प्रदेश के अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल की ओर से कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। दायर जनहित याचिका में कहा गया था कि राज्य में नियमों और मापदंडों का पालन किए बिना निजी नर्सिंग कालेजों का संचालन हो रहा है। मध्य प्रदेश में कुल 666 नर्सिंग कॉलेज थे। वहीं कोविड काल में 200 नए कॉलेज खोले गए। हाईकोर्ट में मामला पहुंचने पर 165 कॉलेज की मान्यता निरस्त की गई।