मत्स्य महासंघ की काम-काज समिति की बैठक संपन्न...

छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति बढ़कर  मिलेगी !


इंदौर l 30 अगस्त 2022 l मंत्रालय में जल संसाधन, मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास मंत्री तुलसीराम सिलावट के अध्यक्षता में मत्स्य महासंघ काम-काज समिति की 106वीं बैठक संपन्न हुई। बैठक में विभाग की प्रमुख सचिव कल्पना श्रीवास्तव, संचालक मत्स्योद्योग भारत सिंह, मत्स्य महासंघ के प्रबंध संचालक पुरुषोत्तम धीमान सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे। इस दौरान मंत्री सिलावट ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की।

मंत्री सिलावट के अध्यक्षता में आयोजित काम-काज समिति की बैठक में मत्स्य महासंघ के कर्मचारियों को 34 प्रतिशत महंगाई भत्ता करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ मछुआ कल्याण तथा मछुआ समाज के बच्चों को  शिक्षा देने के लिए विभाग द्वारा ने दी जाने वाली छात्रवृत्ति को भी बढ़ाने का निर्णय लिया गया। मंत्री तुलसीराम सिलावट ने निर्देश दिए की छात्र और छात्राओं को बड़े शहरों में कोचिंग संस्थाओं में पढ़ाई के लिए भी सुविधा और अनुदान दिया जाए उसके लिए आगामी काम काज समिति में प्रस्ताव लाया जाए। इसके साथ ही ऐसे मछुआ समाज के बच्चे जिनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई है उनको भी कौशल विकास प्रशिक्षण से जोड़कर रोजगार के नए अवसर प्रदान करने के लिए काम किया जाए।

श्री सिलावट ने कहा कि राज्य सरकार के अन्य कर्मचारियों की तरह ही मत्स्य महासंघ के कर्मचारियों को भी महंगाई भत्ता देंगे। मंत्री ने कहा कि मछुआ समाज के लोगों को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए विशेष अनुदान और प्रोत्साहन राशि देने के लिए विशेष कैंप लगाए जाने का भी निर्णय लिए गया है। जिससे मछुआ समाज के सर्वांगीण और समुचित विकास के लिए शासन की अन्य योजना का लाभ भी दिया जाएगा।

मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास मंत्री श्री सिलावट ने मत्स्य महासंघ और विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष का राशि का पूरा उपयोग नहीं किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की और सख्त निर्देश दिए कि बजट में आवंटित राशि का पूरा उपयोग किया जाये। मत्स्य उत्पादन के लक्ष्य को बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं।श्री सिलावट ने कहा कि मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए गुजरात, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, पं. बंगाल सहित विभिन्न राज्यों के एक्सपर्ट्स और मछली उत्पादन से जुड़े लोगों के साथ बैठक कर रणनीति बनाने के बात कही। मीठे पानी में ज्यादा मछली पालन करने वाले राज्यो के एक्सपर्ट और निजी संस्थाओं से भी संपर्क कर कार्योजना बनाई जाए।