फेरों के दौरान धर दबोचा…

पुलिस के रचे हुए फैमिली ड्रामा में फंसी लुटेरी दुल्हन

सागर। मध्य प्रदेश के सागर में लुटेरी दुल्हन को पकड़ने के लिए पुलिस को फैमिली ड्रामा करना पड़ा। दुल्हन के खिलाफ पुलिस को पांच महीने पहले शिकायत मिली थी। जिसके आधार पर कुंवारों को लुटने वाली को गिरफतार करने के लिए पुलिस अलर्ट हो गई। लुटेरी दुल्हन को पकड़ने के लिए टीआई दूल्हे के नकली फूफा बने तो एसआई दूल्हे के पिता और कॉन्स्टेबल ने दूल्हे के नकली भाई का किरदार निभाया। पुलिस की तरफ से जाल फैलाकर की गई कार्रवाई में लुटेरी दुल्हन और दलाल फंस गए। बता दें कि 15 फरवरी 2022 को सरखड़ी निवासी लक्ष्मण पुत्र नत्थू ठाकुर ने ज्योति नाम की एक युवती से शादी की थी। शादी के तीसरे दिन बाद ही वह घर से जेवरात और 50 हजार रुपए लेकर फरार हो गई। 

परिजनां की माने तो वह करीब तीन लाख रूपये लेकर भाग गई थी। काफी तलाशने के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं लग सका। परिवार के लोगां ने उसकी काफी खोजबीन की थी। पुलिस तभी से लुटेरी दुल्हन की तलाश में जुटी थी। पुलिस को एक सप्ताह पहले सूचना मिली थी कि एक लुटेरी दुल्हन भोपाल में किसी को लुटने की फिराक में हैं। सूचना पर पुलिस अलर्ट हो गई। दुल्हन को पकड़ने के लिए पुलिस ने ड्रामा रचा। थाना प्रभारी शशिकांत गुर्जर ने जाल बिछाते हुए मुखबिर को दूल्हा बनाकर शादी कराने की योजना बनाई। टीआई शशिकांत गुर्जर दूल्हे के फूफा बने। कॉन्स्टेबल दुर्गेश सिलावट दूल्हे का भाई बने और अभिषेक पटेल ड्राइवर। योजना के मुताबिक, एएसआई रामलखन पायक लड़के का पिता बना। दलाल के जरिए एक लाख रूपये में शादी कराने की डील फिक्स हुई, इसकी एवज में पुलिस ने एडवांस में उसे 5 हजार रुपये दिए। 

सभी बात तय होने के बाद दोनों पक्षां ने सागर के परेड मंदिर में शादी कराने का फैसला किया। तय कार्यक्रम के मुताबिक, दूल्हे के साथ पुलिस घराती और बाराती बनकर पहुंची। यहां फेरे के दौरान पुलिस ने लुटेरी दुल्हन को धर दबोचा। पुलिस ने पकड़ी गई लुटेरी दुल्हन की पहचान रहली निवासी रजनी अहिरवार और दलाल गुड्डू पटेल के रूप में की हैं। अभी दो अन्य आरोपी फरार हैं। धोखाधड़ी के शिकार हुए लक्ष्मण ठाकुर ने पुलिस को बताया कि उसके मामा के लड़के इंद्राज सिंह ने उनकी शादी कराई थी। इसके एवज में 50 हजार रुपये लिए थे। 10 फरवरी को शादी की बात पक्की हुई। सागर के बाघराज मंदिर से शादी की। आरोप है कि शादी में उसने फोटों भी नहीं  खींचने दी थीं।