विभागीय जिम्मेदारी संभालेंगे सिसोदिया...

ईडी की गिरफ्त में भी बिना विभाग के मंत्री बने रहेंगे सत्येंद्र जैन !

नई दिल्ली। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद उनसे सभी जिम्मेदारी ले ली गई है। ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की हिरासत में सत्येंद्र जैन के पास फिलहाल कोई विभाग नहीं होगा, वे बिना विभाग के मंत्री बने रहेंगे। केजरीवाल सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल सत्येंद्र जैन के पास जो भी जिम्मेदारी थीं। अब वे उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया देखेंगे। सत्येंद्र जैन के पास स्वास्थ्य, उद्योग, पावर, गृह विभाग, शहरी विकास, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण तथा जल मंत्रालय था। अब यह सभी विभाग मनीष सिसोदिया देखेंगे। प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में सत्येंद्र जैन फिलहाल बिना किसी विभाग के मंत्री होंगे। 

बता दें कि दिल्ली सरकार में मंत्री सत्येंद्र जैन को सोमवार को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया था। डी की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो के 2017 के एक मामले पर आधारित है, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि सत्येंद्र जैन और उनकी पत्नी पूनम जैन ने फरवरी 2015 और मई 2017 के बीच 1.47 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति अर्जित की थी। यह उनकी आय के ज्ञात स्रोतों के दोगुने से भी अधिक थी। इसके बाद से भाजपा और आम आदमी पार्टी नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार जारी है। आम आदमी पार्टी जहां सत्येंद्र जैन के बचाव में उतरी है। वहीं भाजपा सत्येंद्र जैन को हटाने की मांग कर रही है। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा है कि दिल्ली सरकार के सभी बड़े बजट या महत्व के 18 विभागों का काम उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सौंपे जाने से दिल्ली की जनता अचंभित है। 

दिल्ली सरकार में कुल 29 नामित विभाग हैं, जिनमें से पर्यावरण सहित चार विभाग मंत्री गोपाल राय के पास हैं तो मनीष सिसोदिया को वित्त, शिक्षा, लोक निर्माण, स्वास्थ्य सहित 18 विभाग हैं। शेष दोनों मंत्रियों इमरान हुसैन एवं राजेन्द्र गौतम के पास 2-3 विभाग हैं। प्रवीण शंकर कपूर ने आज मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से सवाल किया है कि आखिर उन्हें एक ही मंत्री मनीष सिसोदिया में ऐसी क्या काबलियत दिखती है जो उन्हें 18 विभाग सौंप दिये? इतने विभाग एक मंत्री को देने के बोझ से जहां सरकार का काम कुप्रभावित होता है, वहीं उचित निरीक्षण के अभाव में भ्रष्टाचार की समभावनाएं भी बढ़ती हैं। दिल्ली भाजपा प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री से पूछा है आखिर क्या कारण है वह अपने वरिष्ठ साथी गोपाल राय पर भी विश्वास नहीं कर पा रहे हैं।