शासन को 9 लाख 90 हजार रुपए एवं 1,75000 रुपए की राशि की आर्थिक छति कारित की !

शलभ भदौरिया को 3 वर्ष की जेल एवं 50 हजार रुपए जुर्माना 

भोपाल। प्राप्त जानकारी के अनुसार मासिक पत्रिका , श्रमजीवी पत्रकार, का पंजीयन वर्ष 1972 में भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक कार्यालय दिल्ली से पंजीयन क्रमांक 3276/72 होना बताया गया जबकि इस पंजीयन क्रमांक पर श्रमजीवी पत्रकार का पंजीयन विवेचना पर नहीं पाया गया और इस कूटकृत / फर्जी पंजीयन प्रमाण पत्र का दुरुपयोग वर्ष 1972 से लगातार 2003 तक जारी रहा। इस कारण वर्ष जांच हेतु प्रकरण की विवेचना धारा -173 ,( 8 ,) द0 प्र0 स0 के अंतर्गत जारी जांच में अवैध रूप से आर्थिक लाभ प्राप्त कर भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग के साथ धोखाधड़ी कर शासन को 9 लाख 90 हजार रुपए एवं 1,75000 रुपए की राशि की आर्थिक छति कारित की , आरोपी गण का यह कृत्य प्रथम दृष्टया के अंतर्गत धारा 420,467,468,171,120 वी  भा दा वि के अंतर्गत दणडनीय अपराध पाया गया।

इसी आधार पर भारत सरकार के डाक विभाग से पोस्टल छूट पाने के लिए आवेदन दिया। उसी पत्र के आधार पर डाक विभाग ने अपने पत्र में  लिखा कि आपको सूचित किया जाता है कि आपका पत्र नियमों के अनुसार इस कार्यालय के क्रमांक भोपाल संभाग म,प्र, 1084/95 में पंजीकृत किया गया (संलग्न)।

भोपाल के डाक विभाग के द्वारा पत्र क्रमांक ई 2 भो ,सं ,/ 26 / 2018 - 20 दिनांक 8 ,1, 2021 को अपने पत्र में कहा कि शलभ भदौरिया ने फर्जी दस्तावेज लगाकर शासकीय धन के रूप में प्राप्त राशि वसूल कर ली गई है।

लेकिन विभाग ने गुमराह करते हुए जानकारी दी और वसूली राशि नहीं बताई। और यह भी नहीं बताया कि राशि कब से कब तक का जिक्र नहीं किया।

डाक विभाग ने अपने पत्र क्रमांक सी आर / आर टी आई- 5 / 1447/ शारदा / 2021 - 22 भोपाल ल

दिनांक  29 - 7 - 2021 में स्वीकार किया कि श्रमजीवी पत्रकार को डाक पंजीयन 16,11,95 में डाक दर में छूट प्रदान की ( संलग्न) 

डाक विभाग के पत्र क्रमांक तक / 22- 4460/00 भोपाल 

दिनांक 25 अगस्त  2003 के द्वारा आरोपी शलभ भदौरिया से मूल प्रमाण पत्र मांगा गया जो 11,8,2003 तक मूल प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया।(संलग्न,)

फरियादी ने अपने शिकायत पत्र दिनांक 17,5,2003 में स्पष्ट शब्दों में आरोप लगाया कि जनसमपर्क विभाग के अपर संचालक रघुराज सिंह  की श्रमजीवी पत्रकार समाचार पत्र को विज्ञापन देने में प्रमुख भूमिका रही और वे विज्ञापन शाखा के प्रभारी थे। उन्होंने  शलभ भदौरिया के  साथ साथ गांठ करके लाखों रुपए का कमीशन खोरी किया। पुलिस ने भी अपनी जांच में रघुराज सिंह को सह आरोपी बनाने का जिक्र किया पत्र क्रमांक पी 2 में अनुसंधान अधिकारी ने अपने पत्र में लिखा कि 9 लाख 90 हजार रुपए का विज्ञापन फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर अवैध रूप से शासन की राशि का आहरण किया...(  संलग्न, ) पी 2

इस पूरे प्रकरण में अनुसंधान अधिकारी ने सह आरोपी रघुराज सिंह को होना था लेकिन उसको निकाल दिया यह जांच संदेहास्पद है।

आरोपी के सहकर्मियों ने माननीय न्यायालय में असत्य साक्ष किये , अपने कथनो में गोल मोल कथन देकर आरोपी शलभ भदौरिया को बचाने का काम किया।

आरोपी शलभ भदौरिया के द्वारा फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर बैंक में खाता खोला जिसका अनुसंधान अधिकारी ने बैंक स्टेटमेंट नहीं लिया यदि बैंक स्टेटमेंट लिया होता तो बड़ा भ्रष्टाचार का खुलासा हो जाता।

जनसंपर्क विभाग कि सहायक संचालक सुश्री उमा भार्गव ने आरोपी के प्रभाव में आकर फर्जी प्रमाण पत्र को बिना ओरिजनल देखें प्रमाणित कर दिया ।जो कदाचरण की श्रेणी में आता है और इससे यह सिद्ध होता है कि विभाग के अधिकारियों की सांठगांठ थी।

माननीय न्यायालय ने अभियोग पत्र चलने के उपरांत  आरोपी शलभ भदौरिया ने हाजिरी माफी नामा आवेदन प्रस्तुत किया कि वह अशक्त हैं चलना फिरना असंभव है लेकिन मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं किया। इस तरह न्यायालय को गुमराह किया।

नोट - यह है कि टाइटल " श्रमजीवी पत्रकार," वर्ष 1995 में भारत सरकार को माननीय कलेक्टर भोपाल के यहां से अनुमोदन कराकर केन्द्र सरकार के पंजीयक भारत के समाचार पत्रों ,नई दिल्ली भेजा गया।

उक्त पत्र का उत्तर भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक के यहां से जबाव दिया गया कि इस नाम का टाईटल नहीं मिल सकता।तब आरोपी शलभ भदौरिया के द्वारा एक फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर उसे मूल के रूप में, ओरिजनल, बताकर और जनसंपर्क विभाग से समाचार पत्र लगाकर तथा प्रसार संख्या 4500 बताई जो सदस्यों को भेजा जाता था।

आई पी सी कि धारा 420 में 7 वर्ष की सज़ा का प्राविधान है जिसमें आरोपी को तीन वर्ष की सज़ा दी गई है।

धारा 471 में 3 वर्ष की सज़ा है में 2 वर्ष की सज़ा दी गई है। आदेश में यह भी कहा गया है कि दोनों 

एफआईआर दिनांक 23 - 2 - 2006 

प्रारंभिक जांच - 17/03 ,24 -9 - 2003

घटना वर्ष - 1999 से 2003 के मध्य 

फरियादी द्वारा शिकायत 17/5/2003 को की गई परन्तु जांच अधिकारी द्वारा 26/5/2003 बताई गई 

5 - राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के थाना प्रभारी ने अपनी समरी में बताया कि आरोपी ने वर्ष 1999 से मार्च 2003 तक 9 लाख 90 हजार रुपए का शासकीय विज्ञापन से लिया। 

धारा 471 में 3 वर्ष की सज़ा है में 2 वर्ष की सज़ा दी गई है। आदेश में यह भी कहा गया है कि दोनों सज़ा साथ साथ चलेगी।

चूंकि आरोपी पूर्व में भी एक क्रिमिनल केस में 294,326,506 का आरोपी रहा है प्रकरण क्रमांक आर टी,2071/04....(  संलग्न ) 

आरोपी शलभ भदौरिया के द्वारा 9 अगस्त को दिए गए शपथ पत्र में जो हस्ताक्षर किए गए हैं उन पर भी प्रश्न चिन्ह लगता है क्योंकि पुर्व में किए गए हस्ताक्षर से भिन्न है।

मुझे पूरा भरोसा है कि माननीय न्यायालय उचित निर्णय लेगा। फरियादी एक पत्रकार हैं जिसने भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में आर टी ओ आफीस की नौकरी वर्ष 1970 में छोड़ दी थी।

- राधावल्लभ शारदा