सरकार कर रही इस्लाम के खिलाफ दुष्प्रचार…

हमारा मुकाबला हिंदू से नहीं, हुकूमत से है : अरशद मदनी

देवबंद में जमीयत उलमा-ए-हिंद का दो दिनी राष्ट्रीय सम्मेलन चल रहा है। 25 राज्यों के 1500 उलमा यहां जुटे हैं। शनिवार को सम्मेलन का पहला दिन था। उलमाओं ने देश के हालातों पर चिंता जताई। बाबरी मस्जिद, ज्ञानवापी, गाय, मॉब लिंचिंग और हिंदू-मुस्लिम एकता को तोड़ने जैसे मुद्दों से सम्मेलन गरमाया रहा। यहां पहुंचे उलमाओं से भास्कर संवाददाता ने बात की। आइए एक-एक कर उनकी बातों पर नजर डालते हैं...

जमीयत उलमा-ए-हिंद (A) के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा, "हमारा मुकाबला हिंदू से नहीं, बल्कि हुकूमत से है, जो मरहम की बुनियाद पर आग लगा रही है। हमारी लड़ाई जब भी होगी, सिर्फ मुल्क से होगी। मुल्क हमें हमारा हक देगा तो हम ताली बजाएंगे, वरना अपने हक के लिए अदालत में जाते रहेंगे। 22 मिनट और 27 सेकंड तक चले उनके संबोधन में उन्होंने कहा कि हमें आज के हालात का मुकाबला सड़क पर उतरकर नहीं, प्यार मोहब्बत से करना है। तभी हम कामयाब होंगे। इंसानियत की बुनियाद पर हम मोहब्बत की तालीम को थामेंगे। ऐसा करेंगे तो आग लगाने वाले खुद इस आग में फना हो जाएंगे।" अरशद मदनी ने कहा, "कुछ लोग चाहते हैं कि मुस्लिम सड़कों पर आएं, लेकिन हमें हिम्मत बनाए रखनी है। मुल्क के मौजूदा हालात हमारे खिलाफ हैं। बाबरी मस्जिद पर कोर्ट का फैसला आने तक हम शांत रहे। 

इसके बावजूद देवबंद में फैसले के दिन पुलिस फोर्स आई थी। मुस्लिमों के घरों से गाय उठाकर ले गई थी। मुल्क में हमने ऐसा पहली बार देखा था। देश में नफरत का माहौल बढ़ रहा है। हमारे उलमा ने देश की आजादी से लेकर बाबरी मस्जिद जैसे मुद्दों तक कुर्बानियां दी।" कोर्ट में विचाराधीन ज्ञानवापी मामले को लेकर उन्होंने कहा कि हमें ये लड़ाई कानूनी और संवैधानिक तरीके से लड़नी है। देश में हिंदू-मुस्लिम के दिलों में हुकूमत खाई बढ़ाने का काम कर रही है। यहीं हालात रहे तो हमारे मुल्क की हालत श्रीलंका जैसी हो जाएगी। उन्होंने कहा, "हम कहीं बाहर से नहीं आए हैं। ये देश जितना उनका है, उतना ही हमारा है। लेकिन देश की यह बदकिस्मती है कि सत्ता में बैठे लोग धर्म के नाम पर लोगों को नफरतों में बांट रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा कि डरने और घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। 

जो धर्म के नाम पर लोगों को बांटकर देश को बर्बाद कर रही है। हमें सड़कों पर उतरे बिना हालातों का मुकाबला करना है।" अरशद ने कहा कि इस्लाम धर्म इंसानियत का संदेश देता हैं। बहुसंख्यक समाज से नजदीकियां बढ़ानी चाहिए। उन्हें अपने मदरसों और स्कूलों में क्या शिक्षा दी जाती है। ये समझाना होगा। इस देश में ऐसे भी लोग हैं, जिन्होंने मॉब लिंचिंग जैसे मुद्दों और हालात पर अपने अवार्ड वापस किए और प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जताई। हम सरकार के सामने अपनी बात रखेंगे। अगर सरकार नहीं समझेगी तो देश बर्बाद हो जाएगा। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना असद महमूद मदनी ने कहा, "नफरत के खेल को बंद करना और कराना होगा। देश में नफरत का बाजार गरम किया जा रहा है। देश में छोटी मैच्योरिटी के लोग ऐसी स्थिति बना रहे हैं। एक समुदाय को प्रताड़ित किया जा रहा है। 

मुल्क में लोगों को धर्म और विवादों के नाम पर बांटने की कोशिश की जा रही है। इसका हम सब विरोध कर रहे हैं।" जमीयत उलमा-ए-हिंद के नेशनल सेक्रेटरी मौलाना नियाज अहमद फारूकी ने कहा, "देश में इस्लाम के खिलाफ नफरत फैलाई जा रही है। हम ईंट का जवाब पत्थर से नहीं देंगे। जो हमें या हमारे बुजुर्ग को गाली दे, तो हमें भी ऐसा करना चाहिए। ऐसा हमारा मजहब अनुमति नहीं देता है। हमें सब्र से काम लेना है। जो गलतफहमी है, उसे दूर करने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने 29 मई को होने वाले प्रस्ताव के बारे में बताया है कि तालिम में पिछड़े मुसलमानों की कमी कैसे दूर की जाए? ज्ञानवापी के साथ दूसरी मस्जिदों को लेकर चर्चा होगी। वक्फ की प्रॉपर्टी पर नाजायज कब्जों को लेकर चर्चा होगी।"

रविवार को इन मुद्दों पर चर्चा -

  • ज्ञानवापी और मथुरा ईदगाह
  • मुल्क के कानून और कॉमन सिविल कोड
  • इस्लामी तालीम
  • हिंदी जुबान और इलाकाई भाषा को आगे बढ़ाना