भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने…

राजस्थान में करौली दंगे और ईआरसीपी को लेकर सियासी पारा तेज !

राजस्थान में विधानसभा चुनाव में अभी करीब डेढ़ साल का समय है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियां एक-दूसरे को घेरने की कोशिश में जुटी है। भारतीय जनता पार्टी करौली दंगे को लेकर प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार को घेरने के लिए सड़कों पर उतर आई है। दंगा पीड़तों से मिलने के लिए भाजपा की न्याय यात्रा करौली पहुंचने से पहले ही रोक दी गई। इसके बाद दौसा-करौली बॉर्डर पर जमकर बवाल हो गया। इधर राजस्थान ईस्टर्न कैनाल परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर हैं। पूर्वी राजस्थान को राष्ट्रीय परियोजना की सौगात मिले इसे लेकर कांग्रेस सड़कों पर है। 

13 जिलों में कांग्रेस प्रदर्शन कर रही है। इस सबके बीच सीएम गहलोत ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र की मोदी सरकार और जल शक्ति मंत्री पर हमला करते हुए भेदभाव और वादाखिलाफी के आरोप लगाये हैं। मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि आज अजमेर, जयपुर, दौसा, करौली, सवाई माधोपुर, झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, टोंक, अलवर, भरतपुर और धौलपुर में पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन हो रहा है। मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि जब दूसरे प्रदेशों में चल रहीं 16 परियोजनाओं को राष्ट्रीय परियोजना बनाया जा सकता है तो राजस्थान जैसे मरुस्थलीय और गहराते जल स्तर और बिना बारहमासी नदियों के राज्य की इस जल परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित न करना समझ के परे है। आखिर राजस्थान के साथ केन्द्र सरकार भेदभाव क्यों कर रही है ? गहलोत ने केंद्र की मोदी सरकार के साथ जल शक्ति मंत्री को भी निशाने पर लिया है। 

सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि यह कोई अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस परियोजना वाले बयान का वीडियो सामने आने के बाद भाजपा को यह बताना चाहिए कि अब तक इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना क्यों नहीं घोषित किया गया। वहीं मंत्री महेश जोशी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जनहित के हर मुद्दे पर एक है। जल शक्ति मंत्री ने बेवजह इस्तीफे की बात कही। जोशी ने कहा कि हमारे लिए ईस्टर्न राजस्थान कैनाल परियोजना जनहित का मुद्दा है। हम इससे पीछे नहीं हटेंगे और जब जल शक्ति मंत्री यह कहते हैं कि हमारी कथनी और करनी में फर्क नहीं है तो उन्होंने जो कहा उस पर कायम रहते हुए  जल शक्ति मंत्री शेखावत को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।