सरकार ने छूट का दायरा बढ़ाया…

MP में अब आरक्षित मूल्य से 15 प्रतिशत कम मिलने पर भी होंगे शराब दुकानों के ठेके

भोपाल। प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर सहित 42 जिलों में अभी तक शराब दुकानों के ठेके पूरे नहीं हुए हैं। 31 मार्च तक ठेके होने जरूरी हैं, क्योंकि एक अप्रैल से नई आबकारी नीति के तहत दुकानों का संचालन होना है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने मंगलवार को दुकानों की नीलामी के लिए आरक्षित मूल्य से 15 प्रतिशत कम मिलने पर भी ठेके देने का निर्णय लिया। अभी यह दर नौ प्रतिशत निर्धारित की गई थी। उधर, दस जिलों की सभी शराब दुकानों के ठेके हो गए हैं। दो दिन में बाकी जिलों में प्रक्रिया पूरी करनी है। जो दुकानें नीलाम होने से बच जाएंगी, उनके संचालन के लिए अलग से निर्णय लिया जाएगा। 

आबकारी अधिकारियों ने बताया कि विदिशा, सीधी, पन्ना, हरदा, मंडला, शाजापुर, झाबुआ, डिंडोरी, अनूपपुर और आलीराजपुर जिले की सभी शराब दुकानों के ठेके हो गए हैं। बाकी जिलों प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। आबकारी आयुक्त कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि इस निर्णय से अधिकांश दुकानें ठेके पर चली जाएंगी। जो दुकानें शेष रहेंगी, उनके संचालन को लेकर नीतिगत निर्णय लिया जाएगा। होमगार्ड या कर्मचारी आउटसोर्स करके भी दुकानों का संचालन कराया जा सकता है। सभी जिला अधिकारियों को वैकल्पिक व्यवस्थाएं करके रखने के लिए कहा गया है। आठ डिस्टलरी करेंगी देशी शराब की आपूर्ति प्रदेश में देशी शराब की खपत सालाना 12 करोड़ लीटर है। इसकी आपूर्ति के लिए पहली बार आनलाइन निविदा बुलाई गई थी। प्रारंभिक दौर में तीन डिस्टलरी पात्र पाई गईं।

शराब की आपूर्ति पर किसी का एकाधिकार न रहे, इसलिए यह प्रविधान किया गया है कि एक डिस्टलरी तीन करोड़ लीटर से ज्यादा आपूर्ति नहीं कर सकती है। इसके कारण अधिक दर होने की वजह से जो डिस्टलरी दौड़ से बाहर हो गई थीं, वे भी पात्र हो गई हैं। हालांकि, इन्हें उसी दर पर आपूर्ति करनी होगी, जो पहले दौर के लिए पात्र डिस्टलरी ने दी है। प्रतिस्पर्धा होने के कारण जो प्लेन शराब की प्रति पेटी 472 रुपये में दी जाती थी, वो 375 रुपये में मिलेगी। इसी तरह मसाला शराब 556 रुपये की जगह 450 रुपये प्रति पेटी मिलेगी। इसका असर यह होगा कि शराब की आपूर्ति करने वालों का मुनाफा लगभग 300 करोड़ रुपये कम हो जाएगा।