फूलबाग सांईधाम में कथा के दूसरे दिन कथा श्रवण करने पहुंचे सिंधिया...

लंबे समय तक साथ नहीं देता अनीति से कमाया धन : रमेशभाई

 

ग्वालियर। जो लोग ये कहते हैं कि अधिक धन अनीति से ही कमाया जा सकता है, यह पूर्ण सच नहीं हैं। नीति पूर्वक भी धन कमाया जा सकता है। अनीति से कमाया धन लंबे समय तक साथ नहीं देता है और कुछ समय बाद चला जाता है। सांईधाम फूलबाग में श्रीमद्भागवत कथा का अमृतपान कराते हुए यह सद्विचार संत रमेशभाई ओझा ने गुरूवार को दूसरे दिन की कथा में व्यक्त किए। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी लगभग एक घंटे कथा श्रवण किया। संत रमेशभाई ने हजारों श्रोताओं को कथा सुनाते हुए कहा कि हमारे यहां गुजराती मेें कहा जाता है कि जिसकी घरवाली के नाक की नथनी का हीरा जितना बड़ा होगा, उसका धंधा उतना ही खोटा होगा, लेकिन यह सच नहीं हैं। लोग पुरूषार्थ करके नीतिगत ढंग से भी धन कमा रहे हैं। नीति से कमाया धन सुख और अनीति से कमाया धन अशांति पैदा करता है।  

उन्होंंने अनीति से धन कमाने वालों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि लहसुन प्याज नहीं खाएंगे, लेकिन रिश्वत खाने में उनके कोई परहेज नहीं् हैं। धार्मिक इतने है कि पानी छानकर और गरीबों का खून सीधे पीते हैं। उन्होंने कहा धन नीति से कमाओ। समाज में रीति से रहो और भगवान का भजन प्रीति से करो। इस त्रिवेणी में जो स्नान कर लेता है वो नित्य प्रयागराज में स्नान करने का पुण्य हासिल करता है। उन्होंनें कहा कि समाज की दशा खराब इसलिए है कि कोई दिशा दिखाने वाला नहीं हैं। ब्राह्मणों का करो सम्मान...उन्होंने कहा कि संसार देवीय शक्तियों के अधीन है और देवीय शक्तियां मंत्रों के अधीन है और मंत्र शक्ति ब्राह्मणों के पास है,इसलिए ब्राह्मण वंदनीय है।ब्राह्मण भगवान के विराट स्वरूप का मष्तिष्क है। क्षत्रिय भुजाएं, वैश्य धड़ और शूद्र चरण हैं। चरण हो तो गतिशीलता नहीं रहेगी,लेकिन सबसे महत्वपूर्ण अंग मस्तिष्क ही होता है, इसलिए हमें वंदनीय ब्राह्मण की रक्षा करनी चाहिए।  

उन्होंने धर्म और राष्ट्र का मर्म समझाते हुए कहा कि जिस राष्ट्र के संविधान में धर्म में श्रद्धा नहीं होगी, वहां राष्ट्र के संविधान मेें भी श्रद्धा नहीं होगी। धर्मसत्ता, समाज और शासन मिलकर समाज को सुनियंत्रित करते हैं, जिससे समाज का मंगल होता है। धर्म पाप और पुण्य का बोध कराता है। समाज नैतिक और अनैतिक का फर्क कर गलत नहीं करने से रोकता है। राजा परीक्षत के कथा प्रसंग में कथामृत का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि देवताओं से प्राप्त अमृत से दीर्घ जीवी हो सकते हैं लेकिन कथामृत से दिव्यजीवी हो जाते हैं। देवता भी कथा श्रवण के लिए जब गंगातट पर पहुंचे तो यह जानकर राजा परीक्षत ने अमृत को त्याग कथामृत का चयन किया। शुकदेव से परीक्षत ने कथा सुनी और सभी भयों के साथ मौत के भय से भी मुक्त हो गए।यही मुक्ति है। उन्होंने कहा कि कथा कोरा कर्मकांड नहीं है। ये जीवन को सफल बनाने वाली आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जो सत्य, प्रेम और करुणा का संदेश देती है।  

कथा रूपी गंगा का गौमुख करुणा है। करुणा से ये प्रगटी है। कथा प्रवाहित होकर जिस समुद्र मेें मिलती है, उसका नाम प्रेम है। करुणा और सत्य भगवान का स्वरूप है। मोह को मुक्तिमार्ग का सबसे बड़ा खलनायक बताते हुए उन्होंने कहा कि मोह अनेक प्रकार के उपद्रव करता है।वही मुख्य शत्रु हैै, वही खलनायक है। रावण मोह का , कंभुकरण अंहकार और मेघनाद काम का प्रतीक है,लेकिन मोह का क्षय हो जाता है और धीरे धीरे अंहकार,काम सब काल के गाल में समां जाते हैं। महादेव का तीसरा नेत्र जब खुलता है तो सब भस्म हो जाता है, इसलिए परमात्मा की प्राप्ति के लिए प्रयास करें, इसी निमित्त मनुष्य जन्म मिला है। कथा के बीच बीच में राधेनाम का संकीर्तन कर उन्होंने श्रोताओं को आनंद सागर में डुबो दिया। जब उन्होंने भजन तू प्यार का सागर है, तेरी हर बूंद का प्यासे हम सुनाया तो श्रद्धालु श्रोता आनंद की बैरतनी में तैरते नजर आए। पायो जी मैंने रामरतन धन पायो...भजन सुन श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।

सिंधिया ने पहनाई अनूप को मराठी पगड़ी

कथा श्रवण करने के लिए केंद्रीय उड्यन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शाम 4 बजे से पहले कथा स्थल पर पहुंचे और करीब एक घंटे उन्होंने कथा श्रवण किया। सिंधिया ने मंच पर जाकर संत रमेशभाई ओझा को सिंधिया राजवंश की परंपरा की शाही पगड़ी पहनाई, ठीक वैसी ही पगड़ी उन्होंने कथा की संपूर्ण व्यवस्थाओं का संयोजन कर रहे पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा को भी पहनाई। पांडाल में कथा श्रवण के दौरान सिंधिया अनूप मिश्रा के नाती नन्हे भाविक को गोद मेें लेकर खिलाते नजर आए। इस मौके पर उर्जा मंत्री सांईभक्त मंडल ट्रस्ट के अध्यक्ष पोहरी के विधायक एवं राज्यमंत्री सुरेश राजखेड़ा, सांईभक्त मंडल ट्रस्ट के अध्यक्ष योगेश शुक्ला, आनंद सावंत, शांति समिति के सदस्य संजय शर्मा, महेश मुद्गल, महेंद्र सैंगर, कमल शर्मा, ब्रजेश राजपूत, विजय शर्मा, पवन सेन, सुनील पटेरिया सहित हजारों श्रोताओं ने कथा श्रवण किया।

आज रात आठ बजे से कवि सम्मेलन

कथा पांडाल में 11 मार्च को रात्रि 8 बजे से अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें ख्यातिनाम कवि दिल्ली के प्रवीण शुक्ल, कीर्ति काले, मैनपुरी के बलराम श्रीवास्तव, ओरछा की सुमित मिश्रा, नोएडा की प्रियंका राय श्रद्धालु श्रोताओं के बीच काव्यपाठ करेंगी।