गोपाचल के भगवान पार्श्वनाथ के इतिहास में प्रथम बार…

मुनिश्री के सानिध्य में 18 से 23 तक होगा पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव

 

ग्वालियर। जीवनमें तीन रिश्ते किस्मत से मिलते हैं। अच्छी पत्नि, अच्छी संतान और अच्छा दोस्त। पत्नी का चुनाव घर वाले और रिश्तेदार की सहमति से होता है। संतान प्रकृति की देन है, लेकिन दोस्त का रिश्ता तो हम स्वयं चुनते हैं। यदि पत्नी खराब मिली तो एक जन्म ही खराब होता है, लेकिन यदि दोस्त खराब बन गया तो तुम्हारी आदतें और संस्कार सब बेकार हो जाएंगे और सारा जीवन पाप कमाने में निकल जाएगा, जिससे एक नहीं कई जीवन बर्बाद हो जाएंगे। पत्नी से भी अधिक सावधानी मित्र के चयन में बरतना चाहिए। यह विचार वात्सल्य सरोवर राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने रविवार को नई सड़क स्थित चंपाबाग धर्मशाला में संबोधित करते हुए कही। मुनिश्री विनिबोध सागर महाराज ऐलक विनियोग सागर महाराज मौजूद थे।

मुनिश्री ने कहा कि एकांत वातावरण से जीवन में नीरसता आती है। भले ही एक दोस्त हो लेकिन अच्छे विचारों वाला हो। जहां दोस्त में स्वार्थ पनपने लगता है, वहीं से दोस्ती की हत्या हो जाती है। हमारा आचरण संगति पर टिका होता है और जीवन आचरण पर। जीवन की सार्थकता सद्विचारों के व्यक्ति के साथ संगति तथा सदाचरण से होती है। जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि गोपाचल के भगवान पार्श्वनाथ के इतिहास में प्रथम बार गणाचार्य विराग सागर महाराज के मंगल आशीर्वाद से राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज, मुनिश्री विजयेश सागर महाराज, मुनिश्री विनिबोध सागर, ऐलक विनियोग सागर महाराज एवं ब्रह्मचारिणी प्रियंका रीना एवं नीतू दीदी के मंगल सानिध्य में 18 से 23 फरवरी तक  अयोध्या नगरी फूलबाग मैदान में मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव आयोजित किया जाएगा। 18 फरवरी को घटयात्रा सोलह स्वप्नों मंचन होगा।

19 को गर्भ कल्याणक इंद्रसभा होगी। 20 को जन्मोत्सव शोभायात्रा। 21  दीक्षा कल्याणक। 22 ज्ञान कल्याणक एवं 23 मोक्ष कल्याणक गजरथ फेरी के संपन्न होगा। योगी धर्मवीर मुनिश्री विजयेश सागर महाराज ने कहा कि दूसरे की सिखाई गई शिक्षाए ग़लत भी हो सकती है पर अंदर से प्रकट हुई शिक्षा ग़लत नहीं सत्य ही हुआ करती है। आज के समय में समस्याए नई है पर समाधान पुराने ही पुराने है। ऐसे पुराने समाधान से व्यक्ति पागल होगा तो और क्या होगा? समस्याएँ जब नई हो तो समाधान भी नए होने चाहिए। ज़िन्दगी रोज़ बदल जाती है अब वह ज़िन्दगी नहीं है जो कल थी और कल वह ज़िन्दगी नहीं थी जो परसों थी। ज़िन्दगी रोज़ बदल जाती है। स्वयं का समाधान ही समस्या का समाधान है। पर स्वयं का समाधान तब हो पायेगा जब हम सत्य की आँखे खोल लेंगे।