बैठक के बाद अब गतिरोध खत्म होने की उम्मीद…

12 सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर संसद में जमकर हुआ हंगामा

12 सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन हंगामा होता रहा और कार्रवाई बाधित होती रही। विपक्षी पार्टियों का कहना था कि सरकार इस निलंबन के ज़रिये विपक्षी पार्टियों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है जबकि सरकार की तरफ से कहा गया कि विपक्षी पार्टी के सांसदों का जो आचरण था वह संसद की गरिमा गिराने वाला था लिहाजा उसी को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है। हालांकि राज्यसभा में नेता सदन पियूष गोयल ने कहा कि अगर निलंबित सांसद अपनी गलती मानते हुए माफी मांगते हैं तो उनके निलंबन के फैसले पर पुनर्विचार हो सकता है। संसद के दोनों सदन फिर चाहे लोकसभा हो या राज्यसभा विपक्षी सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल निलंबन के मुद्दे पर नारेबाजी करते रहे और इसके चलते सदन की कार्रवाई भी बाधित हुई। 

राज्यसभा से तो विपक्ष ने वॉकआउट भी कर दिया। इस वॉकआउट से पहले राज्यसभा में नेता विपक्ष मलिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जिस तरह से सांसदों को निलंबित करने का फैसला किया गया वह विपक्ष की आवाज दबाने के लिए किया गया है। इसके साथ ही मलिकार्जुन खड़गे ने सवाल उठाया कि अगर घटना मॉनसून सत्र की थी तो फिर कार्रवाई शीतकालीन सत्र में क्यों हुई। इस दौरान निलंबित सांसदों का कहना था कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया और जब गलत नहीं किया तो माफी क्यों मांगे। निलंबित सांसदों की दलील है कि वह सदन में सिर्फ जनता से जुड़े हुए मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहे थे और लोकतंत्र में विपक्ष के पास ये अधिकार है कि वो विरोध प्रदर्शन कर अपनी बात सरकार तक पहुंचा सके। विपक्ष के द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर खुद राज्यसभा के चेयरमैन वेंकैया नायडू ने भी सदन के सामने जानकारी रखी। 

वेंकैया नायडू ने कहा कि जिन सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की गई उनका आचरण सदन की गरिमा गिराने वाला था और ऐसा वह लगातार करते रहे। हालांकि उस दौरान भी उनको लगातार चेतावनी दी जा रही थी लेकिन वह फिर भी नहीं माने। उसी को ध्यान में रखते हुए यह कार्रवाई की गई और फिलहाल निलंबन वापसी का सवाल ही नहीं उठता। इसके बाद राज्यसभा में नेता सदन पीयूष गोयल ने सांसदों के खिलाफ की गई कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि सांसदों के खिलाफ की गई कार्रवाई उनके आचरण को देखते हुए की गई थी। हर एक सांसद के खिलाफ सबूत मिले थे और उन्हीं के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। इसके साथ ही यह भी साफ किया कि विपक्ष दो अलग-अलग सत्रों में घटना और कार्रवाई के मुद्दे पर जो सवाल खड़े कर रहा है वो गलत है क्योंकि नियमों के तहत ऐसी कार्रवाई की जा सकती है। 

हालांकि इसके बाद राज्यसभा में डैम सेफ्टी बिल पेश किया जाना था लेकिन सरकार की तरफ से संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा कर ही आगे बढ़ना चाहती है। लेकिन विपक्ष ने सदन से 1 दिन के बॉयकॉट का ऐलान किया है लिहाजा इस बिल पर बुधवार को चर्चा की जा सकती है। जिसके बाद सदन की कार्रवाई बुधवार तक के लिए स्थगित हो गई। हालांकि इस दौरान राज्यसभा के उपसभापति ने भी नेता सदन और नेता प्रतिपक्ष से कहा कि वह विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर चल रहे गतिरोध को बातचीत के जरिए हल करें। इसके बाद सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सरकार और विपक्ष के नेताओं के बीच सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर चर्चा हुई और चर्चा के बाद उम्मीद जगी की अब यह गतिरोध खत्म हो सकता है। अगर ये गतिरोध खत्म होता है तो संसद के शीतकालीन सत्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर शांतिपूर्वक माहौल में चर्चा हो सकती है।