प्रदेश में बिजली संकट, ग्वालियर में 

जब सड़कों पर भैंस घुमाने निकले ऊर्जा मंत्री...

प्रदेश में बिजली संकट गहराता जा रहा है और प्रदेश के ऊर्जा मंत्री सड़कों पर भैंस घुमा रहे हैं। सोमवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है। जिसमें ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर सड़क पर भैंस की चेन लेकर उसे ले जा रहे हैं। यह वीडियो रविवार रात का बताया जा रहा है, लेकिन इस संबंध में ऊर्जा मंत्री से बात नहीं हो पाई है। पर सोशल मीडिया पर यह वीडियो प्रदेश में ऊर्जा संकट से जोड़कर काफी चर्चित हो रहा है। रविवार रात को ही ऊर्जा मंत्री तोमर ग्वालियर लौटे हैं। इस दौरान उन्होंने सोमवार सुबह बहोड़ापुर में विद्युत केन्द्र का निरीक्षण भी किया है। पर उनका सड़कों पर भैंस चराना एक बार फिर चर्चा में हैं।पूरे देश के पावर प्लांटों में कोयले की कमी का संकट का असर अब मध्यप्रदेश में भी दिखने लगा है। मध्य प्रदेश में भी बिजली संकट की आहट हो चुकी है।

बिजली संकट से प्रदेश को बाहर निकालने के लिए प्रदेश सरकार अथक प्रयास कर रही है। इसी बीच प्रदेश के ऊर्जामंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर जिन पर ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी है उनका सड़कों पर भैंस लेकर घूमते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। वैसे तो सिंधिया समर्थक भाजपा नेता व ऊर्जामंत्री प्रद्युम्न सिंह हमेशा अपने अनोखे अंदाज और सादा व्यक्तित्व के लिए चर्चित रहते हैं। कभी वह श्मशान घाट मंे सफाई करने तो कभी उफनते सीवर चेंबर में उतरने के लिए चर्चित रहते हैं। पर इस बार उनका अनोखा अंदाज लोगों को कम ही रास आ रहा है। क्योंकि मौका ही कुछ अलग है। प्रदेश ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रहा है और ऊर्जामंत्री सड़कों पर भैंस लेकर घूमते निकल रहे हैं। सोमवार रात को यह वीडियो सामने आया है।बताया जा रहा है यह एक रात पहले का है। इस संबंध में ऊर्जामंत्री से बात करना चाही तो नहीं हो सकी है।

  • सोशल मीडिया पर सामने आया ऊर्जामंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का यह वीडियो सिर्फ 30 सेकंड का है। इसमें वह एक भैंस की लगाम अपने हाथ में थामे हुए हैं। पीछे एक समर्थक अन्य भैंस की रस्सी को पकड़े हैं। सड़क पर अंधेरे में ट्रैफिक को हटाते हुए जा रहे हैं। उनकी सेवा में तैनात रहने वाला बल उनके पीछे-पीछे जा रहा है। सड़क पर निकलते समय वह हंसी ठिठौली भी करते जा रहे हैं। पर ऊर्जा संकट के दौर में ऐसे उनका भैंस लेकर सड़क पर घूमना इस बाद सोशल मीडिया पर पॉजिटिव नहीं माना जा रहा है। पावर प्लांटों में कोयले के देशव्यापी संकट का असर मध्यप्रदेश में भी दिखने लगा है। 
  • प्रदेश में दो दिन पहले तक की यह स्थिति थी कि सिर्फ 592 हजार टन कोयला बचा है। खरगोन में कोयला पूरी तरह समाप्त हो चुका है। गाडरवाड़ा में भी सिर्फ एक दिन का कोयला बचा है। इससे प्रदेश में बिजली संकट पैदा होगा। इसके बावजूद, ऊर्जा मंत्री का दावा है कि प्रदेश में बिजली संकट नहीं होने दिया जाएगा। मध्यप्रदेश जनरेशन कंपनी के सबसे बड़े श्री सिंगाजी थर्मल पावर प्लांट में दो दिन का कोयला बचा है। प्रदेश में बिजली की डिमांड 10 हजार मेगावॉट तक पहुंच रही है। 
  • इसकी तुलना में प्रदेश में थर्मल, जल, सोलर व विंड से महज 3900 मेगावॉट ही बिजली का उत्पादन हो पा रहा है। शेष बिजली सेंट्रल पावर से ली जा रही है। इससे पहले भी ऊर्जामंत्री अपने अनोखे अंदाज के लिए सोशल मीडिया पर चर्चित रहते हैं। इससे पहले सीवर में उतरकर सफाई करने। बिजली के ट्रांसफार्मर पर चढ़कर सफाई करने, शमशान घाट में श्रमदान करने के साथ-साथ जमीन पर बैठकर लोगों की शिकायत सुनने के उनके अंदाज के चलते वह सोशल मीडिया पर चर्चित रह चुके हैं।