खंडवा लोकसभा समेत विधानसभा की 3 सीटों पर उपचुनाव…

मध्यप्रदेश में थमा उपचुनाव का शोर

मध्यप्रदेश में खंडवा लोकसभा समेत विधानसभा की 3 सीटों रैगांव, जोबट और पृथ्वीपुर में चुनावी शोर बुधवार को थम गया। अब उम्मीवार अगले दो दिन तक घर-घर जाकर प्रचार कर सकेंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अंतिम सभा पृथ्वीपुर में हुई। उन्होंने कहा- मैं ऐलान करता हूं कि पृथ्वीपुर से गुंडों के आतंक का सफाया कर दिया जाएगा। शिवराज के साथ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने भी पृथ्वीपुर में गुंडागर्दी का हवाला देते हुए कहा कि अगर यहां जनता की तरफ किसी ने आंख उठाकर भी देखा तो उसका जवाब ताकत के साथ दिया जाएगा। शर्मा ने यह भी कहा कि यहां सिर्फ कानून का राज रहेगा। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन पृथ्वीपुर में मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष ने पहली बार इस तरह का बयान क्यों दिया? जबकि दोनों नेता पहले भी यहां कई सभाएं कर चुके हैं। 

इसकी पड़ताल की गई, तो पता चला कि बीजेपी के अन्य नेता और मंत्री बैठकों में कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाते रहे कि बीजेपी के जीतने से डर का माहौल खत्म किया जाएगा। शिवराज ने कहा कि जब मैं मुख्यमंत्री बना था, तो चंबल के बीहड़ में अनेक डकैत थे। मैंने कह दिया था, मध्यप्रदेश में या तो डाकू रहेंगे या शिवराज सिंह चौहान। इसका मतलब, जनता का राज और जनता के राज में जनता की आवाज दबा नहीं सकते। प्रचार के अंतिम दिन बीजेपी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सभा की, जबकि कांग्रेस ने सड़क पर शक्ति प्रदर्शन किया। कांग्रेस उम्मीदवार नीतेंद्र सिंह राठौर ने रैली निकाली, हालांकि उनके साथ कांग्रेस का बड़ा नेता नहीं था। 

बीजेपी उम्मीदवार शिशुपाल यादव के समर्थन में मुख्यमंत्री के अलावा प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा, मंत्री गोपाल भार्गव, प्रदुम्मन सिंह तोमर, प्रभुराम चौधरी, विश्वास सारंग, एससीएटी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य समेत कई नेता मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने पृथ्वीपुर में सिविल अस्पताल खोलने की घोषणा की, जबकि उन्होंने जब यहां पहली बार 14 सितंबर को जनदर्शन यात्रा निकाली थी, तब कहा था कि पृथ्वीपुर में सिविल अस्पातल बनेगा, लेकिन उपचुनाव की आचार संहिता लागू होने के पहले सिविल अस्पताल का भूमिपूजन निवाड़ी जिला मुख्यालय में किया गया था। भाजपा ने पृथ्वीपुर सीट को नाक का सवाल बनाकर चुनाव लड़ा है। यहां मुख्यमंत्री शिवराज की सबसे ज्यादा 8 सभाएं हुईं।

हालांकि रैगांव सीट बचाने के लिए यहां 7 सभाएं कीं, जबकि कमलनाथ ने उप चुनाव के दौरान सबसे कम 1 सभा पृथ्वीपुर में की। जानकारों का कहना है कि कांग्रेस ने इस चुनाव में सभाएं करने के बजाय घर-घर संपर्क की रणनीति पर काम किया है, जबकि कांग्रेस ने माहौल बनाने के लिए सभाएं की। उपचुनाव में आचार संहिता लागू होने के दौरान मुख्यमंत्री ने 39 सभाएं कीं, जबकि कमलनाथ ने 14 सभाएं कीं। शिवराज ने सभाओं के अलावा जोबट, रैगांव, खंडवा, बुरहानपुर व पृथ्वीपुर में रात्रि विश्राम भी किया, लेकिन कमलनाथ ने प्रचार के दौरान किसी भी चुनावी क्षेत्र में रात नहीं बिताई। खंडवा संसदीय क्षेत्र की बात करें, तो इसके तहत आने वाली 8 विधानसभा क्षेत्रों में शिवराज सिंह चौहान ने 19 सभाएं की हैं, जबकि कमलनाथ ने यहां 8 सभाएं कीं।