दाताबंदी छोड़ के 400 साल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शताब्दी समारोह…

CM शिवराज ने गुरूद्वारे पहुंचकर टेका मत्था, गुरु हरगोबिंद साहिब को किया नमन

ग्वालियर। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्वालियर के ऐतिहासिक किले पर स्थित गुरूद्वारा दाताबंदी छोड़ पहुँचकर मत्था टेका और गुरू हरगोबिंद साहिब को नमन किया। दाताबंदी छोड़ के 400 साल पूर्ण होने के उपलक्ष्य मंथ यहाँ पर शताब्दी समारोह मनाया जा रहा है। इस महोत्सव में देश-विदेश से सिक्ख श्रृद्धालु गुरुद्वारा दाताबंदी छोड़ में अरदास करने आए हैं। भारतीय संस्कृति के रक्षक और महान परोपकारी सिक्खों के छठवें गुरू हरगोबिंद सिंह साहिब को दाताबंदी छोड़ के रूप में याद किया जाता है। मुख्यमंत्री का राजकीय विमान से अपरान्ह में राजमाता विजयाराजे सिंधिया महाराजपुरा आगमन हुआ। मुख्यमंत्री यहाँ से सड़क मार्ग द्वारा सीधे ग्वालियर किले पर पहुँचे और गुरुद्वारा दाताबंदी छोड़ पहुँचकर शताब्दी समारोह में शामिल हुए। गुरूद्वारा दाताबंदी छोड़ पर मत्था टेकने के बाद मुख्यमंत्री सायंकाल महाराजपुरा विमानतल पहुँचकर विमान द्वारा भोपाल के लिए प्रस्थान किया। 

इस अवसर पर बाबा सेवा सिंह जी सहित अन्य संतजन, सांसद विवेक नारायण शेजवलकर व भाजपा जिला अध्यक्ष कमल माखीजानी एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण और संभाग आयुक्त आशीष सक्सेना, पुलिस महानिरीक्षकl अविनाश शर्मा, पुलिस उप महानिरीक्षक राजेश हिंगणकर, कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह व पुलिस अधीक्षक अमित सांघी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण मौजूद थे। गुरु हरगोबिंद साहिब को मुगल बादशाह जहांगीर ने ग्वालियर किले में कैद कर रखा था। कहा जाता है एक फकीर की सलाह पर जहांगीर ने  गुरु हरगोबिंद जी को रिहा करने का हुक्म जारी किया। पर गुरु साहिब ने यह कहकर रिहा होने से इनकार कर दिया कि हमारे साथ कैद 52 निर्दोश राजा रिहा किए जाएँगे तभी हम बाहर आएँगे।

इस पर जहाँगीर ने शर्त रखी कि जितने राजा गुरु हरगोविंद साहिब का दामन थाम कर बाहर आ सकेंगे वे रिहा कर दिए जाएंगे। बादशाह को लग रहा था कि 52 राजा इस तरह बाहर नहीं आ पाएंगे। पर दूरदृष्टि रखने वाले गुरु साहिब ने कैदी राजाओं को रिहा करवाने के लिए 52 कलियों का अंगरखा सिलवाया। गुरु जी ने उस अंगरखे को पहना और हर कली के छोर को 52 राजाओं ने पकड़ लिया। इस तरह सभी राजा गुरु हरगोबिंद साहिब के साथ रिहा हो गए। गुरु हरगोविंद साहिब को इसी वजह से दाता बंदी छोड़ कहा गया। गुरुजी के रिहा होने की याद में हर साल दाता बंदी छोड़ दिवस मनाया जाता है। इस साल 400 वां दिवस मनाया जा रहा है। ऐतिहासिक ग्वालियर किले पर सिक्ख समुदाय द्वारा गुरुद्वारे की स्थापना कि गई है, जो दुनियाँ भर में गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ के नाम से विख्यात है।

बुधवार दोपहर 3 बजे CM शिवराज सिंह का आने का कार्यक्रम था। CM चौहान डेढ़ घंटा देरी से 4:30 बजे यहां पहुंचे। माहौल उस वक्त बिगड़ गया, जब सिंघु बॉर्डर से आए सिखों ने कृषि कानून और लखीमपुर खीरी घटना का जिम्मेदार भाजपा को बताते हुए शिवराज सिंह चौहान का विरोध शुरू कर दिया। सिख गुरुद्वारा के पास पोर्च में एकत्रित हो गए। समाज के लोग बात करने लगे कि CM को अंदर प्रवेश नहीं करने देंगे। माहौल  देखकर प्रशासन और पुलिस अफसरों ने गुरुद्वारा प्रबंधन से चर्चा कर आक्रोश शांत कराया।इसके लिए स्वयं बाबा सेवा सिंह और बाबा लक्खा सिंह सहित अन्य प्रमुख सिख समाज के संतों ने विरोध करने का मन बना रहे लोगो को समझाया की गुरुघर सबका सांझा है यह किसी को आने से रोका नहीं जा सकता और न ही किसी विरोध करना उचित है। 

तो वहीं प्रशासन ने भी अपनी सक्रियता दिखाते हुए गुरुद्वारा प्रबंधन को आगाह करते हुए चेता दिया था की अगर सीएम के आने पर यहां कोई प्रदर्शन किया गया तो फिर आगे से प्रशासन यह ध्यान में रखेगा कि इस प्रकार के आयोजन होने दे या नहीं। इसके बाद तय हुआ कि CM जब आएंगे, तो सिख समाज के कुछ ही लोग अंदर जाएंगे। बाकी बाहर रहेंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 4.34 बजे गुरुद्वारा दाताबंदी छोड़ की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए अंदर पहुंचे। इसके बाद 4.41 बजे बाहर निकल गए। कहा जा रहा है कि CM चौहान के पास समय नहीं था, इसलिए शॉर्ट कार्यक्रम बनाया गया था। सूत्रों के मुताबिक विरोध होने पर कार्यक्रम शॉर्ट कर दिया। वे मत्था टेककर वापस चले गए। इस दौरान उनके साथ भाजपा कार्यकर्ता व नेता ज्यादा नजर आए। सिख समाज के कम ही लोग दिखे।