अपनी बात तो ठीक से रख नहीं पाता हैं…

अब विपक्ष निकल रहा राजनीतिक टूर पर !

राजनैतिक विरोध वास्तविक तथ्यों के आधार पर करना चाहिए, केवल सत्ता पाने के लिए लोगों को गुमराह करके या भड़का करके, हवा हवाई बातें बना कर नहीं...

राजनीतिक टूर पर निकलने वाले विपक्षी नेताओं से मेरे देश की जनता यह पूछे कि वहां मरे तो 8 लोग हैं। जिसमें 4 एक्सीडेंट में मारे गए और 4 को मार दिया गया तो फिर विपक्ष के ये नेता बात केवल 4 लोगों की ही क्यों कर रहे है ? क्या किसान आंदोलन में इन नेताओं को  सिर्फ अपने वोट दिखाई दे रहे हैं मानवीय संवेदनाएं नहीं ?(मारे गए 4 किसान आंदोलनकारियों के प्रति हमदर्दी दिखाकर) क्या जिन्हें मार दिया गया वे इंसान नहीं थे और ये जो 8 लोग हैं जिन्होंने अपनी जान गवाई है और वह भी किसान आंदोलन के नाम पर केवल और केवल इसी ड्रामेबाजी, नौटंकी वाली, भड़काऊ, ब्लैक मेलिंग और झूठ के आधार पर चलने वाली राजनीति के कारण इन 8 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है । 

इसका जवाब ये राजनीतिक टूर पर निकलने वाले लोग नहीं देंगे। यहां मैं स्पष्ट कर दूं कि मैं कोई मोदी भक्त या BJP भक्त नहीं हूं । लेकिन देश भक्त जरूर हूं। जिस देश में हम रहते उसके प्रति हमारे कुछ कर्तव्य भी होते हैं। केवल अधिकार ही नहीं सब कुछ होते हैं। अधिकार पाने के लिए कुछ जिम्मेदारी भी बनती है। और इस घटना के बाद जो तथ्य निकल कर सामने आ रहे हैं उन पर भी लोगों को बात करनी चाहिए। जिसने एक्सीडेंट किया केवल  व्यक्ति वही कथित किसानों द्वारा मारा गया होता तो शायद मेरा मन इतना व्यथित नहीं होता। क्योंकि उसने एक्सीडेंट किया था। 

घटना के बाद इस प्रकार की प्रतिक्रिया की संभावना बनी रहती है। आक्रोश में लोग ऐसा कुछ कर बैठते हैं। लेकिन देश में इसके लिए भी कानून है उसे अपने तरीके से सजा देता। घटना के बाद जो वीडियो और जो बातें सामने आ रही हैं उसे देखकर तो यही लगता है कि वह एक्सीडेंट उसने जानबूझकर नहीं किया था बल्कि स्वयं को उपद्रवी भीड़ के द्वारा चलाये जा रहे पत्थर डंडों और तलवारों से बचने के चक्कर गाड़ी भगाई और एक्सीडेंट हो गया। जिसकी वजह से ये 4 किसान उसकी चपेट में आ गए और उन्हें अपनी जान गवानी पड़ी। 

घटना के बाद इन प्रदर्शनकारी कथित किसानों ने जो किया क्या वह ठीक था ? इन उपद्रवी कथित किसानों ने तीन अन्य लोगों को मारा जो उस गाड़ी में बैठे थे, एक पत्रकार और दो बीजेपी वर्कर को मारा वह भी तालिबानियों की तरह बर्बर तरीके से लाठी-डंडों से पीट-पीटकर मार डाला। यह कहां तक उचित है ? मेरे देश के किसान कातिल तो नहीं हो सकते ! क्योंकि देश का हर वह व्यक्ति जो इस देश में रहता है और देश से प्यार करता है वह देश के कानून को भी मानता है उसके संविधान के को भी मानता है। और जिसे देश के कानून और संविधान पर भरोसा रखता है। और वहां इस प्रकार की शर्मनाक घटना को अंजाम तक ही नहीं दे सकता। 10 महीने से चल रहा येआंदोलन लोगों को  दर्द दे रहा है। 

हाईवेज को घेर कर बैठे इन आंदोलनकारियों की वजह से लोगों के कारोबार पर भी बनाई है। इस आंदोलन से न जाने कितने लोगों की रोजी-रोटी छिन गई, जो किसान अन्न पैदा करके देता है। बेशक वह अन्नदाता है इसमें कोई शक नहीं है लेकिन एक  अन्नदाता लोगों की रोजी-रोटी छीनने वाला तो नहीं हो सकता । किसान यदि अन्न पैदा करता है तो व्यापारी भी किसान की जरूरतें पूरी करता है, श्रमिक वर्ग, शासन प्रशासन और ब्यूरोक्रेसी में बैठे लोग भी किसान और व्यापारियों की जरूरतें पूरी करते हैं तो फिर किसान अपने आप को सर्वोपरि क्यों मानता है । 

देश, दुनिया, व्यवस्था और इस जीवन को चलाने के लिए सभी का अपना अपना योगदान होता है । सभी एक दूसरे की जरूरतें पूरी करते हैं इसलिए किसी को भी किसी से श्रेष्ठ नहीं समझना चाहिए। बेशक किसान अन्नदाता है लेकिन दूसरों के क कार्यों को भी नकारा नहीं जा सकता। वैसे भी अभी यह तीनों कृषि कानून लागू ही नहीं हुए हैं तो इन्हें लेकर विरोध प्रदर्शन क्यों और अभी तो यह मामला कोर्ट में भी है लंबित है। फिर इसे लेकर इस प्रकार का प्रदर्शन क्यों देश के अंदर किया जा रहा है ? क्या इन लोगों को कोर्ट के फैसले पर भरोसा नहीं है यह संविधान पर ! 

रवि यादव