G News24: एग्जिट पोल ऐसे ही क्लीन स्वीप नहीं दिखा रहे, मुंबई के गुजरातियों ने कर दिया खेला !

 BMC चुनाव:चुनाव के एग्जिट पोल भाजपा की अगुआई वाले गठबंधन को जिता रहे हैं...

 एग्जिट पोल ऐसे ही क्लीन स्वीप नहीं दिखा रहे, मुंबई के गुजरातियों ने कर दिया खेला !

मुंबई बीएमसी चुनाव के एग्जिट पोल भाजपा की अगुआई वाले गठबंधन को जिता रहे हैं. 227 सीटों वाले नगर निगम में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 130 से 150 सीटें मिल सकती हैं. उद्धव ठाकरे की शिवसेना और मनसे का गठबंधन 60 से 70 सीटें जीत सकता है. कांग्रेस काफी पीछे छूट सकती है. एग्जिट पोल्स में उसे ज्यादा से ज्यादा 25 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है. यही नतीजे में तब्दील हुए तो महायुति गठबंधन क्लीन स्वीप करेगा. जब से एग्जिट पोल्स आए हैं लोगों के मन में यह सवाल जरूर होगा कि ठाकरे के गढ़ में इस बार भाजपा ने 'कमल' कैसे खिला दिया? अब इसमें एक गुजरात कनेक्शन भी पता चला है. 

जी हां, मुंबई के कई इलाके ऐसे हैं जहां गुजरातियों की बहुलता है. इस बार इन्हीं गुजरातियों ने एकजुट होकर खेला कर दिया है. घाटकोपर और मुलुंड जैसे गुजराती बहुल इलाकों में वोटिंग के दिन भारी संख्या में लोग वोट डालने पहुंचे थे. कई वोटरों और विश्लेषकों ने इसका कारण समुदाय का भाजपा के प्रति झुकाव माना है. गुजराती लोगों ने हर हाल में चुनाव देने का मूड बना रखा था. 

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक गरोड़िया नगर में एक पोलिंग अधिकारी ने कहा कि 15 जनवरी की सुबह भारी वोटिंग देखी गई. दोपहर तक वोटिंग 50 प्रतिशत तक पहुंच गई थी. घाटकोपर के नितेश नाथवानी ने कहा कि कई परिवार जो आमतौर पर उत्तरायण के लिए गुजरात जाते हैं, उन्होंने इस बार यहीं रुकने का फैसला किया. उन्होंने कहा, 'कई गुजरातियों ने तो चुनावों के लिए अपने सारे प्लान कैंसल कर दिए.'

गुजरातियों को टारगेट करने से थे गुस्सा

भाजपा के विनायक कामत ने दावा किया है कि पार्टी को सभी समुदायों से अच्छा समर्थन मिल रहा है. घाटकोपर के कुछ वोटरों ने यह सोचकर वोट दिया कि चुनाव प्रचार के दौरान गुजरातियों को निशाना बनाने का यह जवाब है. गुजरात से ताल्लुक रखने वाले भावेश शाह ने कहा कि हम गुजरातियों को निशाना बनाए जाने से नाराज हैं. हमारा वोट हमेशा भाजपा को ही जाता है. 

भाजपा की रणनीति

दरअसल, भाजपा की रणनीति ही कुछ ऐसी थी कि उत्तर भारतीयों खासतौर से यूपी-बिहार के करीब 25 प्रतिशत वोटरों को साधने के साथ गुजराती और मारवाड़ी वोटरों को छिटकने से रोका जा सके. बीएमसी में मराठी वोटर सबसे ज्यादा 30 फीसदी के करीब है. भाजपा को पता था कि ठाकरे ब्रदर्स के एक होने के कारण मराठी वोट बंटेंगे. शिंदे सेना उसमें से जितना खींच सकेगी, उसने कोशिश की होगी. भाजपा को बाकी एंगल पर फोकस करना था. 

गुजराती और मारवाड़ी समुदाय बिजनस करता है. इनका राजनीतिक जगह में भी अच्छा प्रभाव है. मालाबार हिल से लेकर मुलुंड, घाटकोप, बोरीवली बेल्ट में इनकी अच्छी खासी संख्या है. यही रणनीति शिंदे की शिवसेना ने मराठी बहुल इलाकों में अपनाई जिससे अपने वोटर को घर से निकालकर पोलिंग बूथ तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जा सके. स्थानीय कार्यकर्ता पूरे दिन वोटिंग के आखिरी मिनटों तक वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने पर ध्यान दे रहे थे. भाजपा भले ही कॉन्फिडेंट दिख रही थी लेकिन कार्यकर्ताओं को चुपचाप यह मैसेज था कि हल्के में नहीं लेना है. इस बार उद्धव ठाकरे और राज ठाकर साथ लड़ रहे हैं. मराठी वोट कम से कम बंटे. 

बीएमसी में भाजपा जीतेगी तो कैसे?

मराठी- 30 प्रतिशत में से जितना खींचा जा सके + उत्तर भारतीय - 25 प्रतिशत (यूपी-बिहार इफेक्ट). दोनों राज्यों में भाजपा सत्ता में है. गुजराती और मारवाड़ी - 17 प्रतिशत के करीब, ये भाजपा के वोटर रहे हैं + दक्षिण भारतीय और अन्य- 10 प्रतिशत से ज्यादा, इन्हें साधने के लिए भाजपा ने तमिलनाडु से अन्नामलाई को बुलाया था.

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