जज बोले-पढ़ाई पर ध्यान दें, कोरोना का खतरा भी अभी टला नहीं…

12 साल का बच्चा स्कूल खुलवाने कोर्ट पहुंचा 

नई दिल्ली। कोरोना के कारण डेढ़ साल से ज्यादा समय से ज्यादातर स्कूल बंद हैं। ऐसे में एक 12 साल के बच्चे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर केंद्र व राज्य सरकारों को स्कूल खुलवाने के निर्देश मांग की। इस पर सोमवार को जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और बीवी नागरत्ना की बेंच ने बच्चे से कहा, ‘पढ़ाई पर ध्यान दें। अभी बच्चों को वैक्सीन नहीं लगी है। कोरोना का खतरा टला नहीं है। वहीं, जहां हालात सामान्य हो रहे हैं, वहां राज्य सरकारें स्कूल खोल रही हैं।’ बेंच ने पूछा, ‘जिस तरह के हालात केरल और महाराष्ट्र में हैं क्या स्कूल खोला जा सकता है?’ 

जजों ने याचिकाकर्ता बच्चे के वकील से कहा, ‘हम ये नहीं कहते कि याचिका कितनी गलत है। या फिर प्रचार पाने के लिए लगाई गई है। लेकिन बच्चों को ऐसी नौटंकी में शामिल नहीं होना चाहिए।’ इसके बाद याचिकाकर्ता ने अर्जी वापस ले ली। बच्चे ने कहा था कि ऑनलाइन पढ़ाई कारगर नहीं है। बच्चे तनाव का शिकार हो रहे हैं। गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखने और काेरोना टीकाकरण में प्राथमिकता देने की मांग की गई है। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में इसके लिए याचिका लगाई है। इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच ने केंद्र से दो हफ्ते में जवाब मांगा है। आयोग की वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि केंद्र ने गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं के टीकाकरण के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। 

लेकिन अब कहा जा रहा है कि टीकाकरण का उन पर कुछ प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में नीति स्पष्ट होनी चाहिए। जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच ने एक अन्य मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से दिव्यांगों के टीकाकरण के लिए उठाए कदमों पर जवाब मांगा। आगे की योजनाओं की जानकारी मांगी है। गैरसरकारी संगठन ‘इवारा’ के वकील पंकज सिन्हा ने कहा, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कहा है कि अधिकतम कवरेज के लिए घर-घर टीकाकरण होना चाहिए। झारखंड और केरल ने ऐसा किया है।