पुलिस सही से जांच नहीं कर रही…

यदि जांच में देर होती है तो एसपी की होगी ज़िम्मेदारी : HC

ग्वालियर। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने पुलिस के अन्वेषण पर तल्ख टिप्पणी की है, हाई कोर्ट ने खा है की यदि जांच में देर होती है तो एसपी को साडी ज़िम्मेदारी लेनी होगी। देखने में आ रहा है कि पुलिस जांच में काफी देर कर रही है। जिन केसों में 60, 90, 120 दिन में जांच खत्म कर चालान पेश कर देना चाहिए, उन्हें महीनों तक पेडिंग रखा जा रहा है। सही से जांच नहीं की जा रही है। यदि एसा होता तो पुलिस अधीक्षक मामले को अपने हाथों में ले। जांच में जो अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई जाए। यह आदेश कोर्ट ने भिंड जिले के एक मामले में दिए हैं। भिंड जिले तहसील गोरमी के मोहनपुरा गांव निवासी रामवति नरवरिया ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। 

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता गौरव मिश्रा ने तर्क दिया कि 5 अक्टूबर 2020 को पुलिस थाना गोरमी में लूट, डकैती सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया था। इस मामलेे में एक आरोपित नामजद था। नामजद आरोपित होने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है।आरोपितों को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है अनावश्यक रूप से पुलिस मामले लंबित किए हुए है। कोर्ट ने पाया कि पूरे मामले में पुलिस लापरवाही बरत रही है। हाई कोर्ट ने इस मामले को लेकर कहा कि मामला 8 से 9 महीने से लंबित है। इसलिए अपनी निगरानी में लेकर जांच पूरी कराई जाए। 30 सितंबर तक रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश की जाए।

हाई कोर्ट ने पुलिस अधीक्षकों को तीन प्रमुख आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक जिले का प्रमुख पुलिस अधीक्षक होता है। पुलिस अधीक्षक को देखना चाहिए कि थाने में कोई भी एफआइआर दर्ज होती है, उसकी निश्चित समय में जांच खत्म की जानी चाहिए। चाहे उसमें खात्म लगाई या चालान।

  • किसी अन्वेषण को समय सीमा में खत्म नहीं किया जाता है। एसपी को देखना चाहिए यह किसके कारण लेट हुआ है। उस संबधित अधिकारी पर कार्रवाई होनी चाहिए।
  • एसपी को एक रजिस्टर बनाना चाहिए। इस रजिस्टर में देखना चाहिए कि अन्वेषण समय पर पूरा हो रहा है या नहीं। अन्वेषण की बात एसपी के संज्ञान में आ जाती है। फिर भी अन्वेषण पूरा नहीं हुआ तो उसके लिए एसपी को जिम्मेदार माना जाएगा।
  • यह दिशा निर्देश हर जिले के एसपी को लेकर दिए गए हैं।