तीसरी लहर का खतरा !

आज जब पूरा देश कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के विनाशकारी नतीजों से निपटने में लगा है, यह सूचना मन में मिश्रित भाव पैदा करती है कि इसकी तीसरी लहर भी आने ही वाली है। चूंकि केंद्र सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने इस बात की पुष्टि कर दी है, इसलिए अब न तो इसमें किसी किंतु-परंतु की गुंजाइश रह जाती है और न ही इसे लेकर हैरानी-परेशानी जताने का कोई मतलब बनता है। ले-देकर यही एक बात देखने की रह जाती है कि इस सूचना का उपयुक्त इस्तेमाल करते हुए हम उस तीसरी लहर के आने से पहले खुद को और पूरे तंत्र को उसका सामना करने के लिए किस हद तक तैयार कर पाते हैं। पहली लहर के बाद छह महीने से ऊपर का वक्त मिलने के बावजूद हमने दूसरी लहर की आशंका को जिस तरह से भुलाए रखा, वह सचमुच ऐतिहासिक है। 

न केवल हमारे तंत्र ने ऑक्सिजन जैसी आवश्यक वस्तु का उत्पादन और उसकी अबाधित आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोई अतिरिक्त तैयारी नहीं की, बल्कि आम लोगों को भी इसके लिए मानसिक रूप से तैयार करने की जरूरत नहीं महसूस की गई कि दूसरी बेहद खतरनाक लहर आ सकती है। लोग इसी भुलावे में बने रहे कि अब तो वैक्सीन आ ही गई है, अब कोरोना क्या बिगाड़ लेगा। बहरहाल, अब तीसरी लहर की बात चूंकि काफी पहले से पता है, उम्मीद की जानी चाहिए कि कम से कम इस बार हमें इस तरह के बहानों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा कि लहर अप्रत्याशित रूप से तेज थी या यह कि इसकी भयावहता का किसी को अंदाजा नहीं था। हालांकि अभी भी संभावित तीसरी लहर के आने का समय पता नहीं किया जा सका है, यह भी तय नहीं है कि तब तक कोरोना वायरस के कितने और किस-किस तरह के वैरिएंट आ चुके होंगे। उन सब पर वैज्ञानिक बिरादरी लगातार काम कर रही है। लेकिन अच्छी बात यह है कि वायरस के रूप जो भी हों, संक्रमण के उसके तरीकों में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। 

इसका मतलब यह हुआ कि बचाव के तरीके लगभग वही रहेंगे। यानी दूरी बरतना, लोगों के निकट संपर्क में नहीं आना, मास्क पहनना, बार-बार हाथ धोते रहना और हां बारी आने पर वैक्सीन जरूर ले लेना। ये ऐसे उपाय हैं जिन पर सतर्क अमल सुनिश्चित कर हरेक व्यक्ति इस युद्ध में अहम योगदान कर सकता है। मगर पर्याप्त वैक्सीन का उत्पादन और उसकी सप्लाई सुनिश्चित करने, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने और मरीजों के लिए ऑक्सिजन, हॉस्पिटल्स में बेड, डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी वगैरह का इंतजाम करने की जिम्मेदारी सरकारी तंत्र की ही बनती है। उम्मीद की जाए कि दोनों अपने-अपने हिस्से की जिम्मेदारी का उपयुक्त ढंग से निर्वाह करते हुए तीसरी लहर को शुरू में ही नियंत्रित कर लेंगे।