जी का जंजाल बनी आईटीएमएस लाइटें…

वाह री स्मार्ट सिटी की स्मार्ट ट्रैफिक लाइटें !

ग्वालियर। इंटेलीजेंट ट्रेफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) अब जी का जंजाल बनती जा रही है, केवल इसकी आड में स्मार्ट सिटी डव्ल्पमेंट कारपोरेशन और उसकी ठेका कंपनी टेक्नोसेस आम वाहन चालकों से पैसा उगाहने का काम कर रहे हैं। ग्वालियर शहर में आईटीएमएस के तहत इतनी ज्यादा ट्रेफिक लाइटें लगा दी गई हैं, जिससे आम वाहन चालक का सडक़ों पर वाहन चलाना दूभर हो गया है। अब किसी भी कारण को ढूंढकर वाहनों के चालान बनाकर जबरन घरों पर भेजे जा रहे हैं। 

अब कोरोना में जब आदमी के पास रोजगार धंधे नहीं हैं, तब 500-500 रूपये के चालान आम आदमी की कमर तोड रहे हैं। इन चालानों को लेकर कोई शिकायत करने भी स्मार्ट सिटी के कमांड सेंटर में जाये तो उसकी सुनवाई तक नहीं की जाती, बस उसे जबरन चालान भरने की हिदायत दी जाती है। आईटीएमएस की ट्रेफिक लाइटों में इतनी कमी है उन पर स्मार्ट सिटी डव्लपमेंट कारपोरेशन व टेक्नोसेस का ध्यान ही नहीं है। सारे शहर की ट्रेफिक लाइटें एक साथ हरी और लाल रहती हैं। 

इसमें वाहन चालक भ्रमित रहता है वह निकले तो चालान और नहीं निकले तो चालान या पीछे से वाहन ठुकने का डर। इसी प्रकार पडाव चौराहे से फूलबाग तक का रास्ता एक किलोमीटर से भी कम है, यहां पर कुल तीन ट्रेफिक लाइटें आईटीएमएस द्वारा लगा दी गई हैं, जो ट्रेफिक व मोटर व्हीकल एक्ट के नियमानुसार गलत हैं। यहां वाहन चालक तीन-तीन लाइटों से भ्रमित हो जाता है और दुर्घटना का शिकार हो रहा है। 

यह तीन लाइटें पडाव चौराहा, लक्ष्मीबाई स्टेचु, और फूलबाग पर लगी हैं। इनको देखकर वाहन से आने वाले पर्यटक अचंभा करते हैं। इन लाइटों के संदर्भ में ग्वालियर सेंज के आईजी अविनाश शर्मा भी नाराजगी जता चुके हैं, लेकिन स्मार्ट सिटी डव्लपमेंट कारपोरेशन ने यह लाइटें अभी तक नहीं हटाई हैं और ना ही बंद की है। वैसे रोटरी पर लाइटें लगती ही नहीं है। कुल मिलाकर पडाव चौराहे पर सर्वाधिक विषम स्थिति है, यहां केवल उर्जा मंत्री प्रद्युम्र सिंह तोमर के क्षेत्र की तरफ से आने वाले वाहनों के ही चालान काटे जा रहे हैं।