ड्रग एवं कौसमैटिक्स क़ानून 1940 के प्रावधानों के ख़िलाफ़…

CAIT ने ऑनलाईन दवाईयों की बिक्री का किया विरोध

ग्वालियर। कैट मध्यप्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र जैन एवं महामंत्री मुकेश अग्रवाल ने बताया कि कैट द्वारा अमजोन, फ्लिपकार्ट, रिलायंस एवं ऐसी फार्मेसी कंपिनयां जो कि ऑनलाईन क्रय-विक्रय कर रही हैं, उनका विरोध करते हुए मामले को उठाया है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया, महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल के साथ कैट का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय वाणिज्य मंत्री  पीयूष गोयल से नई दिल्ली में मिला और उन्हें ज्ञापन भेंट किया। इसमें अमजोन, फ्लिपकार्ट, रिलायंस सहित अन्य ई-फार्मेसी कंपनियां कास्मेटिक कानूनों के प्रावधानों के खिलाफ अन्य दवाई कंपनियां ऑनलाईन व्यापार कर रही हैं, जिस पर रोक लगाने की मांग कैट ने की है। 

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री  पीयूष गोयल के साथ आज नई दिल्ली में हुई एक मुलाक़ात में कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने उन्हें एक ज्ञापन सौंपते हुए अमज़ोन, फ्लिपकार्ट, रिलायंस, सहित अन्य ई फ़ार्मेसी व्यापार में ड्रग एवं कौसमैटिक्स क़ानून 1940 के प्रावधानों के ख़िलाफ़ दवाइयों की ऑनलाइन बिक्री करने का मुद्दा ज़ोरदार तरीक़े से उठाकर इन कम्पनियों द्वारा ऑनलाइन व्यापार के ज़रिए दावा व्यापार पर रोक लगाने की माँग की है। 

कैट ने  गोयल को दिए अपने ज्ञापन में कहा है कि फार्मईज़ी,, मेड लाइफ़, अमज़ोन , फ्लिपकार्ट, रिलायंस के स्वामित्व वाली कम्पनी नेटमैड, 1 एमजी, आदि पर आरोप लगते हुए कहा कि ये 30% -40% छूट के साथ  कीमतों पर परिचालन करके ई-कॉमर्स व्यापार  का दुरुपयोग कर रहे हैं और विदेशी निवेश के कारण इन ई-फार्मेसियों को मुफ्त शिपिंग देने में  कोई नुकसान नही उठाना पड़ता है जबकि देश भर में लाखों केमिस्ट एवं दवा विक्रेता सरकार के हर क़ानून एवं नियम का पालन करते हुए अपने लिए एवं कर्मचारियों के लिए तथा उनके परिवारों के लिए रोज़ी रोटी कमाते हैं। 

कैट के मध्यप्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र जैन एवं प्रदेश महामंत्री मुकेश अग्रवाल ने कहा की पूंजी डंपिंग की यह प्रथा उद्योग के निर्वाह और भविष्य के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकती है क्योंकि ई-फार्मेसियों की अपनी सीमाएं हैं पर उपभोक्ताओं से सीधा संबंध और आपातकालीन परिस्थितियों में दवाओं की किसी भी समय पहुचाने के कार्य सिर्फ एक केमिस्ट की दुकान ही कर सकती है। गोयल को एक और ज्ञापन में  कैट ने भारतीय ई-कॉमर्स व्यापार को सभी ख़ामियों से मुक्त कराने के लिए एफ़डीआई  नीति के प्रेस नोट 2 के स्थान पार एक नया प्रेस नोट जारी करने की मांग दोहराई और कहा क़ी ई कॉमर्स में सभी हितधारकों के लिए एक समान स्तर पर प्रतिस्पर्धी माहौल देने के प्रावधान नए प्रेस नोट में सुनिशचित किए जाएँ।