कारोबारियों के लिए निराशाजनक रहा बजट…

राज्य बजट में किसी भी कर की दर में बढ़ोत्तरी नहीं की जाना सराहनीय : MPCCI

ग्वालियर। म.प्र. विधान सभा में आज, प्रदेश के माननीय वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत किए गए वर्ष 2021-22 के बजट में “आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश” को ध्यान में रखते हुए बजट तैयार करने का प्रयास किया गया, परन्तु यह बजट राज्य के कारोबारियों के लिए निराशाजनक है। एमपीसीसीआई के अध्यक्ष-विजय गोयल, संयुक्त अध्यक्ष-प्रशांत गंगवाल, उपाध्यक्ष-पारस जैन, मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल, मानसेवी संयुक्त सचिव-ब्रजेश गोयल एवं कोषाध्यक्ष-वसंत अग्रवाल ने बजट में किसी भी प्रकार का नवीन करारोपण नहीं किए जाने एवं प्रचलित करों में किसी भी प्रकार की बढ़ोत्तरी नहीं किए जाने की सराहना करते हुए, वित्तीय वर्ष 2021-22 के प्रस्तावित राज्य बजट को “न खुशी-न गम” वाला बताया है। 

पदाधिकारियों ने बजट प्रस्तावों में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के अन्तर्गत मैग्निफिसेंट एम. पी. इन्वेस्टमेंट अट्रेक्शन स्कीम हेतु रु. 1237 करोड़ का प्रावधान किए जाने एवं औद्योगिकीकरण अधोसंरचना विकास हेतु रु. 480 करोड़ का प्रावधान किए जाने सहित स्मार्ट सिटी हेतु रु. 900 करोड़ का प्रावधान किए जाने, एमएसएमई विभाग के अन्तर्गत एमएसएमई प्रोत्साहन व्यवसाय निवेश संवर्धन/सुविधा प्रदाय योजना हेतु रु. 200 करोड़ का प्रावधान किए जाने तथा ग्वालियर में एलिवेटेड रोड के लिए रु. 450 करोड़ की राशि का प्रावधान किए जाने का स्वागत किया है। पदाधिकारियों ने कहा है कि बजट पूर्व चेम्बर ऑफ कॉमर्स द्वारा भेजे गए सुझावों में राज्य सरकार से राज्य बजट में पेट्रोल-डीजल पर ‘वेट’ की दर को कम किए जाने की माँग की गई थी। म.प्र. में पेट्रोल-डीजल पर कर की दरें पड़ौसी राज्यों से काफी अधिक होने के कारण प्रदेश में विकास की गति पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, परन्तु राज्य सरकार द्वारा बजट प्रस्ताव में किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की जाना, अत्यन्त ही निराशाजनक एवं विकास विरोधी है। 

इसी के साथ प्रोफेशनल टैक्स को समाप्त कर, प्रदेश के व्यवसाईयों को राहत प्रदान किए जाने सहित स्टॉम्प ड्यूटी को 20% तक कम किए जाने की माँग की गई थी क्योंकि म. प्र. में स्टॉम्प ड्यूटी सर्वाधिक होने के कारण इसका सीधा असर, रियल स्टेट के व्यापार पर पड़ रहा है। रियल स्टेट में मंदी के कारण राज्य में रोजगार के अवसर भी कम हो रहे है। इसलिए यह आवश्यक है कि प्रदेश में स्टॉम्प ड्यूटी को 20% तक कम की जाए, जिससे रियल स्टेट के व्यापार में वृद्धि हो सके। साथ ही, ऐसा होने से प्रदेश में लाखों लोगों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। बावजूद इसके राज्य बजट में इस पर कटौती नहीं किए जाने से आम नागरिकों सहित रियल स्टेट के कारोबारियों को निश्चित ही निराशा हाथ लगी है।