कलेक्टर ने जन-सुनवाई में ही बनाया फरियादी का निवास प्रमाण-पत्र...

फरियादियों को इधर-उधर घुमाया तो होगी निलंबन की कार्रवाई : श्री सिंह

ग्वालियर। विजय रोंघे निवास व जाति प्रमाण-पत्र को लेकर कई दिनों से परेशान थे। तहसीलदार ने प्रमाण-पत्र बना भी दिया, पर उससे उनका काम नहीं चला। सो अपनी फरियाद लेकर कलेक्ट्रेट की जन-सुनवाई में पहुँच गए। कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने विजय रोंघे एवं उनकी धर्मपत्नी की व्यथा ध्यानपूर्वक सुनी और अपने दस्तखत कर जनसुनवाई में ही विजय रोंघे का निवास व जाति प्रमाण-पत्र बनाकर उन्हें सौंप दिया। मंगलवार को हुई जन-सुनवाई में कलेक्ट्रेट में लगभग 75 फरियादियों के आवेदन पत्रों को दर्ज कर उनके निराकरण की समय-सीमा निर्धारित की गई। 

साथ ही अन्य फरियादियों की समस्याओं का समाधान भी कलेक्टर श्री सिंह एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने किया। दीनदयालनगर ग्वालियर निवासी विजय रोंघे सामान्य वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने झाँसी (उत्तरप्रदेश) निवासी अनुसूचित जाति की महिला ज्योति वर्मा से प्रेम विवाह किया है। सामान्य वर्ग के व्यक्ति द्वारा अनुसूचित जाति की महिला से विवाह करने पर उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा दो लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। पर इसके लिये जिला अधिकारी, कलेक्टर अथवा मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर से जारी निवास व जाति प्रमाण-पत्र होना जरूरी है। ज्योति का तो झाँसी में जिला अधिकारी के हस्ताक्षर से यह प्रमाण-पत्र बन गया।

मध्यप्रदेश में निवास प्रमाण-पत्र जारी करने का अधिकार तहसीलदार को है, सो विजय का प्रमाण-पत्र तहसीलदार मुरार द्वारा बना दिया गया। तहसीलदार के हस्ताक्षरयुक्त प्रमाण-पत्र को उत्तरप्रदेश में मान्य नहीं किया गया। जाहिर है विजय-ज्योति दम्पत्ति को दो लाख रूपए की आर्थिक सहायता नहीं मिल पा रही थी। अपनी इस परेशानी को लेकर विजय – ज्योति दम्पत्ति विभिन्न दफ्तरों के चक्कर लगा रहे थे। तभी उन्हें किसी ने बताया कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर हर मंगलवार को कलेक्ट्रेट में जन-सुनवाई होती है। सो विजय अपनी धर्मपत्नी के साथ कलेक्ट्रेट की जन-सुनवाई में पहुँचे। कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने जब उनके सामने ही हस्ताक्षर कर प्रमाण-पत्र बना दिया तो विजय एक बारगी भरोसा नहीं कर पाए। 

जब कलेक्टर श्री सिंह ने विजय को यह प्रमाण-पत्र सौंपा तो वे खुशी से झूम उठे और पति-पत्नी खुशी-खुशी घर लौटे। कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने जन-सुनवाई में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के जनरल मैनेजर को बुलाकर निर्देश दिए कि वे इस आशय का प्रमाण-पत्र दें कि समर्थन मूल्य पर धान बेचकर गए सभी किसानों के खाते में धनराशि पहुँच गई है। धनराशि न पहुँचने पर सीसीबी के जीएम इसके लिये जवाबदेह होंगे और उनके वेतन से कटौती की जा सकेगी। जनसुनवाई में भितरवार क्षेत्र के एक गाँव से आए दो किसानों ने अभी तक खाते में धनराशि न पहुँचने की शिकायत कलेक्टर से की थी। सीसीबी के जनरल मैनेजर ने बताया कि संबंधित सोसायटी के माध्यम से किसानों के खाते में धनराशि पहुँचाई गई है। 

जन-सुनवाई में न्यू गोविंदपुरी से पहुँची मोनिका पाल का 6 माह का लंबित वेतन भुगतान कराने के निर्देश कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने राजस्व अधिकारियों को दिए। मोनिका पाल ने निजी संस्था रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ आईटी मैनेजमेंट ठाठीपुर में काम किया था। उनका कहना था कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान 6 माह का वेतन इस संस्था द्वारा नहीं दिया गया है। कलेक्टर ने जन-सुनवाई में इलाज के लिये मदद की आस में आए लोगों के इलाज का इंतजाम कराया। साथ ही असहाय जरूरतमंद लोगों को आर्थिक सहायता भी दिलाई।

जन-सुनवाई में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी किशोर कान्याल, अपर कलेक्टर आशीष तिवारी, टी एन सिंह व रिंकेश वैश्य सहित जिला प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने भी एक – एक कर सभी फरियादियों की समस्यायें सुनीं। साथ ही उनके आवेदनों के निराकरण की रूपरेखा तय की। कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने जन-सुनवाई में सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि अपने अधीनस्थ शासकीय सेवकों को साफ तौर पर ताकीद कर दें कि समस्या लेकर आए हर व्यक्ति को इधर-उधर न घुमाएँ। जिस शाखा में व जिस अधिकारी के यहाँ उनकी समस्याओं का समाधान हो सकता है वहाँ तक उन्हें सही-सही जानकारी देकर पहुँचाएँ। श्री सिंह ने स्पष्ट किया कि जो भी कर्मचारी लोगों को सही सलाह देकर समस्या का निराकरण नहीं करायेंगे उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जायेगी।