स्पेशल बच्चों के लिए स्मार्ट सिटी की पहल…

बहुदिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा का केन्द्र बनेगा इंक्यूबेशन सेंटर

ग्वालियर। शहर के ऐसे युवा प्रतिभावान जिनके पास कोई नया इनोवेटिव आईडिया है, उन्हें अब ग्वालियर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन एक नया प्लेटफार्म देगी। यहां युवा न केवल अपनी छिपी प्रतिभा को निखार सकेंगे बल्कि समाज के ऐसे वर्गों के लिए काम कर सकेंगे, जो शारीरिक दृष्टि से किसी न किसी रूप में दिव्यांग की श्रेणी में आते हैं। स्मार्ट सिटी के माध्यम से बहुदिव्यांग बच्चों को अत्याधुनिक एवं स्मार्ट तरीकों से शिक्षा दी जाएगी, जिससे ऐसे बच्चे भी समाज की मुख्यधारा से जुड सकें। 

स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की सीईओ जयति सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि स्मार्ट सिटी के तत्वाधान में ड्रीमहैचर इंक्यूबेशन सेंटर द्वारा दिव्य दृष्टि संस्था के माध्यम से बहु-दिव्यांग बच्चों की शिक्षा के लिए काम करेगा। ड्रीमहैचर ने दिव्य दृष्टि आर्गेनाईजेशन के साथ मिलकर यह स्टार्टअप शुरु किया है। आर्गेनाईजेशन अंकुश गुप्ता की 7 सदस्यों की टीम के साथ ऐसे दृष्टि बाधित, श्रवण बाधित और स्पेशल चाइल्ड को स्मार्ट तरीके से शिक्षित करने का कार्य करती है, जो पढ़ना लिखना तो चाहते हैं, पर दिव्यांगता कहीं ना कहीं उनके मार्ग में रोड़ा बन रही है।

इस संस्था के द्वारा ब्रेल लिपि के साथ ऐसे संसाधन विकसित किए गए हैं जिन्हें बच्चे सुन और समझ भी सकें। दिव्यांग बच्चों के लिए ऐसी किताबें बनाई गई हैं जिन पर दृष्टि बाधित बच्चा हाथ से समझ सके और ऑडियो, विजुअल एवं किताबें रेज लाइन फाउंडेशन आईआईटी दिल्ली एवं आईएसएलआरटीसी दिल्ली द्वारा तैयार किए हैं। संस्था द्वारा वर्तमान में लगभग 35 बच्चों को विभिन्न एक्टीविटीज के माध्यम से भी  शारीरिक व मानसिक रूप से सक्षम बनाया जा रहा है।सीईओ जयति सिंह ने बताया कि स्मार्ट सिटी का उददेश्य है कि अभी ज्यादातर बहु दिव्यांग बच्चे सामान्य बच्चों के साथ ही शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं जिस कारण ऐसे बच्चों पर शिक्षक ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते हैं। 

इसलिए शासकीय स्कूलों में भी स्पेशल बच्चों के लिए इस प्रकार के पाठ्यक्रमों को शामिल किया जाए एवं शिक्षकों भी अलग से प्रशिक्षित किया जाए। संस्था द्वारा उक्त कार्यक्रम मोतीमहल स्थित स्मार्ट सिटी के इंक्यूबेशन सेंटर में प्रतिदिन सुबह 11ः00 बजे से 2ः00 बजे तक चलाया जा रहा है। जिसमें शहर के बहुदिव्यांग बच्चे व उनके अभिभावक आकर काउंसिलिंग कर सकते हैं।