जानिए क्यों आएगी ऐसी नौबत…

मध्यप्रदेश में फिर से होगा उपचुनाव ! 

भोपाल। मध्यप्रदेश की 28 सीटों पर उपचुनाव को लेकर मतदान हो चुका है. 28 सीटों पर जनता के बीच पहुंचे 355 उम्मीदवारों की किस्मत अब ईवीएम में कैद हो गई है. नतीजे 10 नवंबर को आयेंगे और यह तय होगा कि मध्यप्रदेश की सत्ता पर अगले तीन साल कौन काबिज होगा. बीजेपी की सरकार बनी रहेगी या कांग्रेस की बन जायेगी. इसके लिए जनता को 10 नवंबर का इंतजार करना पड़ेगा. लेकिन आपको यह जानना जरूरी है कि इस चुनाव के बाद मध्यप्रदेश को एक और उपचुनाव के लिए तैयार रहना होगा. २८ सीटों पर उपचुनाव के प्रचार के बीच में ही कांग्रेस को एक झटका लगा था और दमोह विधायक राहुल लोधी कांग्रेस पार्टी और विधायकी से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो गए थे. 

25 अक्टूबर को राहुल लोधी ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की थी. चूंकि 28 सीटों पर नामांकन संबंधी कागजी कार्यवाही पूरी हो चुकी थी, ऐसे में दमोह सीट पर 28 सीटों के साथ चुनाव कराना संभव नहीं था. इसलिए दमोह सीट पर चुनाव आगे के लिए टाल दिये गए. अब इन 28 सीटों पर उपचुनाव के परिणाम और उसके असर के बाद दमोह उपचुनाव की प्रक्रिया पूरी होगी. फिलहाल तो एक सीट पर यानी दमोह पर ही उपचुनाव होगा यह तय माना जा रहा है. लेकिन वर्तमान में राजनीतिक निश्चतता स्थिर नहीं है लिहाजा हो सकता है कि आगे आने वाले वक्त में कुछ और विधायक इधर से उधर हो जाएं. 

इस बात की संभावना कई राजनैतिक दल के नेता अपने बयानों में जाहिर भी कर चुके हैं कि दूसरे दल के विधायक उनके संपर्क में हैं. उपचुनाव का सीधा और सरल नियम है. यदि कोई सीट खाली हो जाती है तो उस सीट पर संविधान के अनुसार 6 महीने के अंदर चुनाव हो जाना चाहिए. इसका अर्थ यह है कि कोई भी सीट 6 महीने से ज्यादा समय तक रिक्त नहीं रह सकती है. लिहाजा उस सीट पर दोबारा चुनाव होता है जिसे उपचुनाव कहा जाता है. हालांकि ऐसा भी नियम है कि विशेष परिस्थिति में चुनाव को कुछ समय के लिए टाला जाये, लेकिन उसके लिए कारण मजबूत होना चाहिए. जैसे मध्यप्रदेश की दो सीट आगर और जौरा में पहले ही उपचुनाव हो जाने चाहिए थे, लेकिन कोरोना के कारण इन्हें टाला गया.

  • जब कोई विधायक या सांसद कार्यकाल पूरा होने से पहले अपने पद से इस्तीफा दे दे.
  • जब किसी विधायक या सांसद का कार्यकाल पूरा होने से पहले निधन हो जाए.
  • जब किसी विधायक या सांसद के चुनाव को अयोग्य घोषित कर दिया जाए.
  • जब किसी विधायक या सांसद का निर्वाचन गलत मानते हुए उसका निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया जाए.
  • जब किसी विधायक या सांसद को पार्टी द्वारा बर्खास्त कर दिया जाये.