नेफेड का दावा : बाजार में नई फसल आते ही…

अगले एक से डेढ़ हफ्ते में कम होंगी प्याज की कीमतें !

नई दिल्ली। देश भर में प्याज की बढ़ी हुई कीमतें जल्द काबू में आएंगी. यह दावा किया है नेफेड के निदेशक ने. नेफेड केंद्र सरकार के अधीन आने वाली वह संस्था जो देश भर में किसानों से प्याज़ खरीदती है, उसका बफर स्टॉक जमा करती है और जरूरत पड़ने पर प्याज की सप्लाई जरूरत मंद राज्यों को करती है. नेफेड की तरफ से कहा गया है कि अगले एक से डेढ़ हफ्ते के दौरान प्याज की बढ़ी हुई कीमतों में कमी दिखनी शुरू हो जाएगी. नेफेड के निदेशक अशोक ठाकुर ने एबीपी न्यूज़ से बातचीत के दौरान साफ तौर पर कहा है कि जनता को घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि अगले एक से डेढ़ हफ्ते के दौरान जयपुर से नई फसल आने लगेगी और जल्द ही आयात भी शुरू हो जाएगा और इसका सीधा असर प्याज की कीमतों पर पड़ेगा. जल्द ही जो प्याज़ आज की तारीख में 80 से 100 रुपये प्रति किलो मिल रहा है, उसकी कीमत में बड़ी कमी देखी जाएगी. नेफेड के निदेशक ने जानकारी देते हुए कहा है कि पिछले कुछ सालों के दौरान लगातार सरकार की कोशिश यही है कि प्याज के बफर स्टॉक में लगातार बढ़ोतरी की जाए और इसी कड़ी में पिछले साल प्याज की खरीदारी पिछले कुछ सालों की तुलना में और ज्यादा की गई थी. 

नेफेड के मुताबिक पिछले साल 1 लाख मीट्रिक टन की खरीदारी की गई थी और जैसे ही देश में प्याज की कीमतें बढ़ना शुरू हुई अलग-अलग राज्यों को 75 हजार मैट्रिक टन प्याज भेज भी दिया गया है. देश की राजधानी दिल्ली की बात की जाए तो नेफेड का कहना है कि यहां पर सफल स्टोर के माध्यम से जनता को सस्ता प्याज मुहैया कराया जा रहा है. नेफेड का दावा है कि सफल स्टोर पर प्याज आसानी से 28 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा जा सकता है, हालांकि एक शख्स एक सीमित मात्रा में ही प्याज खरीद सकता है. नेफेड के मुताबिक जल्द ही देश के दूसरे राज्यों में भी हालात सामान्य होने लगेंगे और प्याज की कीमतों में कमी देखी जाएगी. इस सब के बीच यह साफ कर देना भी जरूरी है कि फिलहाल नेफेड की तरफ से अलग-अलग राज्यों को जो प्याज़ पहुंचाया जा रहा है वो 21 रुपये प्रति किलो की दर से दिया जा रहा है और अगर इसमें ट्रांसपोर्टेशन की कीमत जोड़ दी जाए तब भी दूसरे राज्यों में प्याज की अधिकतम कीमत 28 से 30 रुपये प्रति किलो से ज्यादा नहीं पहुंचती. 

प्याज की बढ़ी हुई कीमतों की वजह की बात की जाए तो नेफेड के मुताबिक हर साल इस वक्त के दौरान प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जाती है उसकी वजह यह है कि ये वो वक्त होता है जब बाजार से पुराना प्याज़ खत्म हो रहा होता है और नए प्याज की फसल आने में वक्त लग रहा होता है. इसी दौरान जो पुराना प्याज़ रखा भी होता है वह भी खराब होने लगता है, क्योंकि प्याज़ अगर 3 महीने से ज्यादा रखा जाता है तो उसमें खराब होने का डर बढ़ जाता है. नेफेड के मुताबिक जब नई फसल बाजार में आने का इंतजार होता है और पुरानी फसल कम होने लगती है, तो नेफेड की तरफ से कोशिश की जाती है कि प्याज को थोड़ा सा और देर तक गोदाम में रखा जाए, जिससे कि जरूरत के हिसाब से राज्यों को भेजा जा सके, लेकिन इस अतिरिक्त वक्त के दौरान प्याज के खराब होने का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है.