गलवान के बलवान हिम वीरों को नमन

वीरसपूतो कितने महान हो तुम...
लुटाके जान वतन की खातिर विजय का दीप जला गये तुम... 
भारत भूमि की वह घाटी शत्रु मुक्त करा गए तुम,
लुटाके जान वतन की खातिर...
लद्दाख के गलवान मे शत्रु--दगाबाज और कायर शत्रु।
धोखे से धावा बोला था.. प्राणघात हमला किया था।।
हे हिम वीरो शत्रुओं की गर्दनें तोड़े तुम....
लुटाके जान वतन की खातिर...
पीछे न हटना आगे बढना...
आगे बढना लडते रहना।
दिखा गए भारत की विषात...
करे न शत्रु ऐसी घात।।
गलवान घाटी से शत्रु को मार भगा गए तुम...
लुटाके जान वतन की खातिर....
साहस और बलिदान तुम्हारा...
याद रखेगा भारत सारा..।
भारत के स्वाभिमान का परचम...
जग में जय जयकार महानतम..।।
छोड़ गए बो दीवानापन जिस पर गर्व करेंगे हम...
लुटाके के जान वतन की खातिर..
अदम्य साहस के परिचायक..
आत्मविश्वास शौर्य दायक..।
रौद्र रूप मे रहे बलवान..
जैसे बजरंगी हनुमान..।।
भारत मां के हे सपूतो पूज्यनीय जो हो गए तुम...
लुटाके जान वतन की खातिर....

उदयभान रजक