विष रहित खाद्य पदार्थों की उपलब्धता…
दो रुपये किलो की दर से गोबर की खरीद रही है सरकार

रायपुर। गायों के संरक्षण और गोपालन को प्रोत्साहित करने के लिए इस योजना की शुरूआत सोमवार को हरेली त्योहार के दिन की गई। पारंपरिक रूप से हरेली पर्व कृषि और पर्यावरण से जुड़ी हुआ है। इसीलिए गोधन न्याय योजना की शुरुआत के लिए इसी अवसर को चुना गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जैसे ही ट्विटर पर गोधन न्याय योजना की घोषणा हैशटैग के साथ किया। महज एक घंटे में हैशटैग भारत भर में ट्रेंड होने लगा। इसमें देश भर से लोगों ने ट्वीट करते हुए सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और योजना की सराहना की। 

इस ट्रेंड में छह हजार से भी अधिक लोगों ने ट्वीट किया। भारत में यह ट्रेंड 13 नंबर तक देखा गया। प्रदेश के गांवों में सुराजी गांव योजना पहले ही लागू की जा चुकी है, जिसके तहत पांच हजार से ज्यादा गोठानों की स्वीकृति दी जा चुकी है। योजना के पहले दिन ही राज्य में पशुपालकों से करीब दो हजार क्वींटल गोबर की खरीदी की गई। गोधन न्याय योजना से पशुपालकों की आय में वृद्धि तो होगी ही, पशुधन की खुली चराई पर भी रोक लगेगी। 

जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा मिलने से रासायनिक खाद के उपयोग में कमी आएगी। खरीफ तथा रबी फसल की सुरक्षा सुनिश्चित होने से द्विफसलीय क्षेत्र में होगा। भूमि की उर्वरता में सुधार होगा और विष रहित खाद्य पदार्थों की उपलब्धता बढ़ेगी, इससे पोषण का स्तर और सुधरेगा। किसानों और पशुपालकों से गोठान समितियों द्वारा दो रुपये प्रति किलो की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है, जिससे महिला स्व सहायता समूहों द्वारा वर्मी कंपोस्ट तैयार किया जाएगा। तैयार वर्मी कंपोस्ट को 8 रुपए प्रति किलो की दर से सरकार द्वारा खरीदा जाएगा।