रीवा सोलर प्लांट पर विवाद…
सरकार का 'असत्याग्रह' या विपक्ष की 'अज्ञानता' !

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रीवा की अत्याधुनिक मेगा सौर ऊर्जा परियोजना राष्ट्र को समर्पित की. पीएम मोदी ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह एशिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना है. हालांकि, उनके इसी दावे पर विवाद हो गया है. कांग्रेस का कहना है कि देश में पहले से ही रीवा से ज्यादा क्षमता वाले प्रोजेक्ट मौजूद हैं. ऐसे में रीवा कैसे एशिया का सबसे बड़ा सोलर पावर प्रोजेक्ट हो सकता है. मध्य प्रदेश के रीवा स्थित जिस सोलर पावर प्रोजेक्ट का वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए उद्घाटन पीएम मोदी ने 10 जुलाई को किया, उसकी क्षमता 750 मेगावाट है. ये करीब 1500 हेक्टेयर जमीन में फैला है. यहां 250-250 मेगावाट की तीन यूनिट हैं. पीएम मोदी ने शुक्रवार को इस प्रोजेक्ट के उद्घाटन के मौके पर अपने संबोधन में कहा, ''आज रीवा ने वाकई इतिहास रच दिया है. रीवा की पहचान मां नर्मदा के नाम से और सफेद बाघ से रही है. अब इसमें एशिया के सबसे बड़े सोलर पावर प्रोजेक्ट का नाम भी जुड़ गया है.'' पीएमओ की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, ''प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मध्य प्रदेश के रीवा में अत्याधुनिक मेगा सौर ऊर्जा परियोजना राष्ट्र को समर्पित की. यह एशिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना है.'' रीवा में अत्याधुनिक मेगा सौर ऊर्जा परियोजना को एशिया का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट कहना कांग्रेस को हजम नहीं हुआ. 

कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने तुरंत ट्वीट कर पीएम मोदी के दावे पर सवाल खड़े कर दिए और उन्हें पावगाड़ा सोलर ऊर्जा पार्क की याद दिलाई. डीके शिवकुमार ने अपने ट्वीट में लिखा, ''केंद्रीय ऊर्जा मंत्री को ये जवाब देना चाहिए कि केंद्र सरकार कैसे रीवा सोलर पार्क (750 मेगावाट), जो आज ही शुरू हुआ, उसे एशिया का सबसे बड़ा बता सकती है, जबकि कर्नाटक का पावगाड़ा पार्क (2000 मेगावाट) इससे काफी बड़ा है और दो साल पहले ही शुरू हो चुका है.'' डीके शिवकुमार ने अपने दूसरे ट्वीट में रीवा और पावगाड़ा को सोलर प्लांट बताया. डीके शिवकुमार के बाद शनिवार सुबह कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इस मसले पर ट्वीट किया. उन्होंने पीएम मोदी के उसी ट्वीट को री-ट्वीट किया जिसमें रीवा सोलर पावर प्रोजेक्ट को एशिया का सबसे बड़ा सोलर प्रोजेक्ट लिखा गया है. अपने ट्वीट में राहुल गांधी ने लिखा, 'असत्याग्रही'. यानी डीके शिवकुमार के बाद राहुल गांधी ने भी पीएम मोदी के दावे को गलत करार दिया. एम मोदी के दावे को गलत करार दे रहे कांग्रेस नेताओं को जवाब देने के लिए खुद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सामने आए और उन्होंने कांग्रेस नेताओं की समझ पर ही सवाल खड़े कर दिए. शिवराज सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा, ''कांग्रेस के एक बड़े 'युवा' नेता जो झूठ के अलावा कुछ नहीं बोलते, उनकी पार्टी के नेताओं ने भी उनकी पाठशाला में पढ़ना शुरू कर दिया लगता है! 

इन कांग्रेसियों को सोलर पार्क और सोलर प्लांट का भी अंतर पता नहीं है और मुंगेरीलाल के हसीन सपने देख रहे हैं कि फिर से सरकार बनाएंगे!'' यानी शिवराज सिंह चौहान ने सोलर पार्क और सोलर प्लांट में अंतर बताते हुए कांग्रेस नेताओं के आरोपों को उनकी जानकारी का अभाव बता दिया. 750 मेगावाट का यह एक सोलर प्लांट है, जिसमें 250-250 मेगावाट की तीन यूनिट हैं. एस एस गौतम के मुताबिक, यह पहला ऐसा प्लांट है जहां एक ही प्वाइंट पर 750 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है. एक ही प्वाइंट का मतलब ये है कि एक ही साइट पर लगाई गईं तीन यूनिट से पावर जनरेट होकर एक सब-स्टेशन में जाती है और उस सब-स्टेशन से ग्रिड लाइन के जरिए मध्य प्रदेश व दिल्ली मेट्रो को बिजली की सप्लाई दी जा रही है. एस एस गौतम के मुताबिक, रीवा का ये प्रोजेक्ट देश का ऐसा पहला प्रोजेक्ट है जहां एक ही प्वाइंट पर एक लाइन से 750 मेगावाट का उत्पादन किया जा रहा है. देश में कहीं भी इतने मेगावाट का एक साथ एक प्वाइंट से उत्पादन नहीं हो रहा है. एस एस गौतम के मुताबिक, किसी भी सोलर पार्क में अलग-अलग प्लांट होते हैं. अलग-अलग डवेलपर कम क्षमताओं के प्लांट से ऊर्जा का उत्पादन करते हैं. यानी एक सोलर प्लांट सिर्फ एक प्लांट होता है जैसा कि रीवा में है और एक सोलर पार्क में कई सोलर प्लांट हो सकते हैं जैसा कि कर्नाटक के पावगाड़ा में है. 

बता दें कि कर्नाटक के पावगाड़ा के जिस सोलर पार्क का हवाला देकर रीवा प्रोजेक्ट पर सवाल उठाए जा रहे हैं उसमें 11 अलग-अलग डवलेपर अलग-अलग क्षमता के प्लांट चला रहे हैं और कुल मिलाकर 2050 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन वहां किया जा रहा है. कांग्रेस के कुछ नेताओं ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का एक पुराना ट्वीट भी शेयर किया है. ये ट्वीट 19 जनवरी 2020 का है. इस ट्वीट में पीयूष गोयल ने लिखा है, ''कर्नाटक के पावगाड़ा स्थित दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पार्क अब ऑपरेशनल है. 2050 मेगावाट क्लीन एनर्जी इससे पैदा हो रही है. ये पार्क किसानों से लीज पर ली गई जमीन पर बना है, सूखा-ग्रस्त इलाकों का सदुपयोग किया जा रहा है और किसानों की आय बढ़ाई जा रही है.'' बता दें कि पावगाड़ा सोलर पार्क की क्षमता पहले 2000 मेगावाट थी, जो बाद में बढ़कर 2050 मेगावाट हो गई थी. पीयूष गोयल ने अपने इस ट्वीट के साथ वेबसाइट solarcompare.co.in का लिंक भी शेयर किया था. इस वेबसाइट पर 'पावगाड़ा सोलर पार्क के प्रोजेक्ट डवलेपर' की लिस्ट दी गई है. लिस्ट में 11 डवलेपर यानी कंपनियों के नाम हैं और हर प्रोजेक्ट की मेगावाट क्षमता अलग-अलग है. सबसे ज्यादा क्षमता टाटा पावर की है, जो 400 मेगावाट सोलर ऊर्जा उत्पन्न करता है. 

यानी पावगाड़ा सोलर पार्क में 11 प्रोजेक्ट डवलेपर मिलकर 2050 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पन्न कर रहे हैं और इनमें से किसी भी एक डवलेपर की क्षमता 750 मेगावाट से ज्यादा नहीं है. बहरहाल, फिलहाल पूरा विवाद सोलर पार्क और सोलर प्लांट शब्दों को लेकर खड़ा हो गया है. कांग्रेस कर्नाटक के सोलर पार्क को सबसे बड़ा बता रही है तो पीएम मोदी के रीवा प्रोजेक्ट को एशिया के सबसे बड़े सोलर प्रोजेक्ट वाले दावे का बचाव करते हुए शिवराज सिंह चौहान कह रहे हैं कि आपको सोलर पार्क और सोलर प्लांट का अंतर ही नहीं पता है. हालांकि, एक दिलचस्प बात ये भी है कि narendramodi.in वेबसाइट पर भी रीवा के प्रोजेक्ट को सौर पार्क यानी सोलर पार्क ही लिखा गया है. वेबसाइट पर लिखा गया है कि इस परियोजना में एक सौर पार्क (कुल क्षेत्रफल 1500 हेक्टेयर) के अंदर स्थित 500 हेक्टेयर भूमि पर 250-250 मेगावाट की तीन सौर उत्पादन इकाइयां शामिल हैं. इस सोलर पार्क को रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड (आरयूएमएसएल) ने विकसित किया है जो मध्य प्रदेश उर्जा विकास निगम लिमिटेड (एमपीयूवीएन) और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की ईकाई सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) की संयुक्त उद्यम कंपनी है.