सैन्य अड्डों पर चीन ने लगाई तोपें…
भारत और चीन की सेना बढ़ा रही हथियारों का जखीरा

भारत और चीन की सेनाओं के बीच तनाव खत्म होता नहीं दिख रहा है। लद्दाख और सिक्किम के कुछ क्षेत्रों में चीन की लगातार बढ़ रही सैन्य गतिविधियों और चीनी सेना द्वारा भारत के निर्माण कार्य में अवरोध उत्पन्न करने के इरादे से इलाके में स्थिति तनावपूर्ण होते जा रही है। रविवार को समाचार एजेंसी पीटीआई ने सेना के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि 25 दिनों से पूर्वी लद्दाख के विवादित क्षेत्रों में चल रहे विवाद के बीच भारत और चीन की सेनाएं सैन्य अड्डों पर भारी उपकरण और तोप व युद्धक वाहनों समेत हथियार प्रणालियों को पहुंचा रहे हैं। इस क्षेत्र में दोनों सेनाओं द्वारा युद्ध की क्षमता में वृद्धि तब आई है जब दोनों देशों ने सैन्य और राजनयिक स्तरों पर बातचीत के माध्यम से विवाद को हल करने के अपने प्रयासों को जारी रखा है। 

सूत्रों ने कहा कि चीनी सेना धीरे-धीरे पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब अपने ठिकानों पर अपने तोपखाने की तोपों, पैदल सेना के लड़ाकू वाहनों और भारी सैन्य उपकरणों के साथ पहुंच रही है। बता दें कि काफी संख्या में चीनी सैनिक इस महीने के शुरू में वस्तुत: सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में घुस आए थे और तबसे पैंगोंग त्सो और गलवान घाटी में बने हुए हैं। भारतीय सेना ने चीनी जवानों के इस अतिक्रमण का तीव्र विरोध किया और उनके तत्काल वहां से वापस लौटने तथा शांति व यथास्थिति बहाल करने की मांग की। चीनी सेना ने डेमचोक और दौलतबेग ओल्डी में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाई थी। ये दोनों संवेदनशील क्षेत्र हैं और पूर्व में यहां दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हो चुकी है।

माना जा रहा है कि चीन ने पैंगोंग त्सो और गलवान घाटी में करीब 2500 सैनिकों को तैनात किया है और धीरे-धीरे अस्थायी ढांचा और हथियारों को बढ़ा रहा है। हालांकि संख्या को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। चीन लगातार कोशिश कर रहा है कि भारत इन क्षेत्रों में निर्माण कार्य पर रोक लगाए जबकि वो खुद यहां तेजी से सड़क निर्माण समेत कई ढ़ांचाओं का निर्माण कर रहा है। हालांकि इस बार भारत ने भी चीन के सामने झुकने से इंकार कर दिया है। भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सैन्य अधिकारियों से साफ़ कर दिया है कि भारत अपने इलाके में हो रहे निर्माण कार्य को जारी रखे। सिंह ने शनिवार को कहा कि चीन के साथ विवाद को सुलझाने के लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर द्विपक्षीय बातचीत चल रही है।