शादी की आयु फिर से होगी तय ! 
लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने पर मंथन शुरू

लड़कियों के विवाह और मातृत्व की आयु तय करने पर मंथन शुरू हो गया है। सरकार ने मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) कम करने के उद्देश्य से मातृत्व प्रवेश आयु की समीक्षा के लिए टास्क फोर्स (कार्य दल) का गठन किया है। पूर्व समता पार्टी अध्यक्ष जया जेटली की अध्यक्षता में गठित 10 सदस्यीय टास्क फोर्स विवाह और मातृत्व की आयु से जुड़े सभी पहलुओं पर गौर करेगा। टास्क फोर्स 31 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट देगा। मातृत्व प्रवेश आयु समीक्षा से संकेत मिलता है कि एक बार फिर लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु बढ़ाई जा सकती है जो अभी 18 वर्ष है। उपयुक्त विधायी उपाय और मौजूदा कानून में संशोधन सुझाना टास्क फोर्स की जिम्मेदारी टास्क फोर्स लड़कियों के बीच उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के सुझाव के साथ उपयुक्त विधायी उपायों और मौजूदा कानूनों में संशोधन पर भी अपनी सिफारिश देगा। कार्य दल सिफारिशों को तय समयसीमा में लागू करने की विस्तृत योजना भी तैयार करेगा। 

लड़कियों के विवाह का आयु का सीधा संबंध मातृत्व में प्रवेश की आयु, माता और व बच्चे की सेहत के अलावा जनसंख्या नियंत्रण व लड़कियों की शिक्षा और करियर से है। स्वस्थ, शिक्षित और सक्षम महिला ही स्वस्थ और जिम्मेदार समाज का सृजन करती है। अभी महिलाओं और बच्चों में कुपोषण भारत की एक बड़ी समस्या है। इस टास्क फोर्स का प्राथमिक उद्देश्य इससे निपटना है। वित्त मंत्री ने 2020-21 का बजट पेश करते समय ही मातृत्व प्रवेश आयु की समीक्षा के लिए टास्क फोर्स गठित करने की घोषणा की थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा था कि 1978 में शारदा एक्ट में संशोधन करके लड़कियों की शादी की उम्र 15 वर्ष से बढ़ा कर 18 वर्ष की गई थी। 

जैसे-जैसे भारत तरक्की कर रहा है, महिलाओं की शिक्षा और करियर के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर बन रहे हैं। उन्होंने कहा था कि मातृत्व मृत्यु दर में कमी लाना तथा पोषण के स्तर में सुधार आवश्यक है। इसके लिए मातृत्व में प्रवेश की उम्र से जुड़े पहलुओं पर गौर और समीक्षा की जरूरत है। वित्त मंत्री ने तब कहा था कि इसके लिए एक टास्क फोर्स (कार्य बल) गठित किया जाएगा। घोषणा के मुताबिक चार जून को सरकार ने अधिसूचना जारी कर मातृत्व प्रवेश की आयु की समीक्षा के लिए टास्क फोर्स का गठन किया। 10 सदस्यीय टास्क फोर्स की अध्यक्ष पूर्व सांसद जया जेटली हैं। 

अन्य सदस्यों में नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर विनोद पाल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, विधायी विभाग के सचिव, स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव, नजमा अख्तर, वसुधा कामथ और दीप्ती शाह शामिल हैं। यह टास्क फोर्स विवाह और मातृत्व आयु पर विचार करने के साथ मां के स्वास्थ्य व पोषण की स्थिति और गर्भावस्था, जन्म एवं उसके बाद नवजात की सेहत के पहलू पर भी विचार करेगी। शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर, कुल प्रजनन दर, जन्म के समय लिंग अनुपात, बाल लिंग अनुपात आदि के साथ स्वास्थ्य और पोषण आदि इसके प्रमुख मापदंड होंगे।