अभी सरकार ही सभी कोरोना पॉजिटिव का करवा रही है  इलाज लेकिन अब…
सिर्फ आयुष्मान योजना के पात्र को ही मिलेगा कोरोना का फ्री इलाज !

ग्वालियर। कोरोना पॉजिटिव मरीज के 10 दिन के इलाज पर शासन 18 हजार रुपये खर्च कर रही है। यदि मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी तो 36 हजार और वेंटीलेटर पर 46 हजार रुपये तक सरकार को खर्च करना पड़ रहे हैं। इसलिए कहा जा रहा है कि कोरोना का इलाज सस्ता नहीं है,जरूरी है कि अपना ख्याल रखें । अभी भले ही सरकार अमीर हो या गरीब सभी का इलाज करवा रही है, लेकिन असल में यह इलाज मुफ्त में नहीं हो रहा, सरकार आयुष्मान के तहत इलाज करा रही है। शहर में आयुष्मान योजना के तहत सुपर स्पेशियलिटी और बिरला अस्पताल में इलाज कराया जा रहा है। उधर आयुर्वेदिक या एमपीसीटी कॉलेज में भर्ती कोविड मरीज की देखरेख पर होने वाला खर्च स्वास्थ्य विभाग के जिम्मे है।

प्रधानमंत्री द्वारा आयुष्मान योजना का शुभारंभ वर्ष 2018 में हुआ था। इस योजना के तहत करीब 1300 तरह की बीमारियों का इलाज है। जिन पर 5 लाख तक का खर्च का भुगतान योजना के तहत किया जा सकता है। जब कोरोना ने देश में दस्तक दी तो मार्च में लॉकडाउन हो गया और इस बीमारी को भी आयुष्मान के तहत दर्ज कर लिया गया। मरीज पर खर्च होने वाली राशि का निर्धारण हर राज्य के लिए अलग -अलग है। अभी इस योजना के तहत कोरोना से ग्रस्त होने वाले हर किसी को इलाज दिया जा रहा है। लेकिन आगे चलकर स्थिति बदल सकती है। सरकार आगे चलकर उन्हीं मरीजों को इलाज देने की बात कर सकती है जिनका आयुष्मान योजना के तहत कार्ड बना हो।

सिम्स हॉस्पिटल, कैंसर अस्पताल, बिरला अस्पताल, अपोलो, नवजीवन, रतन ज्योति, ग्लोबल, जीवन ज्योति नेत्रालय, बोस्टन हॉस्पिटल, एसएम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, कल्याण मेमोरियल एंड केडीजे हॉस्पिटल पहले से ही आयुष्मान के तहत अधिकृत हैं। अस्थाई तौर पर महामारी बढ़ने पर अग्रवाल हॉस्पिटल, कल्याण मल्टी स्पेशियलिटी, माहेश्वरी नर्सिंगहोम, आरआईएमएस हॉस्पिटल को अधिकृत किया गया है। पर अभी केवल बिरला व सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में ही आयुष्मान के तहत मरीजों को इलाज दिया जा रहा है। आगे आवश्यकता पड़ने पर बाकी अस्पतालों का उपयोग किया जा सकेगा।

निजी अस्पताल में भर्ती मरीज यदि कोरोना संक्रमित पाया जाता है तो उसकी जानकारी अस्पताल प्रबंधन को सीएमएचओ कार्यालय में सूचना देनी होगी। कोविड मरीज को इलाज देने से पहले निजी अस्पताल प्रबंधन को सीएमएचओ से परमिशन लेनी होगी। इसके लिए उसे अस्पताल की संपूर्ण जानकारी जैसे उसके पास मरीज को इलाज देने के लिए संसाधन, डॉक्टर, स्टाफ व अलग से कोविड वार्ड उपलब्ध हैं । पर निजी अस्पताल में इलाज लेने वाले मरीज को स्वयं ही खर्च वहन करना होगा।

राशि का निर्धारण
बिना लक्षण वाले मरीज, जनरल वार्डः 1800 रुपये प्रतिदिन, 10 दिन के 18000 रुपये।
लक्षण वाले मरीज, जिन्हें ऑक्सीजन देना पड़े, एचडीयू वार्डः 3600 रुपये प्रतिदिन, 10 दिन ऑक्सीजन देने पर 36000 रुपये।
गंभीर मरीज, वेंटीलेटर का उपयोग होने पर, आईसीयू वार्डः 4600 रुपये प्रतिदिन, 10 दिन वेंटीलेटर लगाने पर 46000 रुपये।

नोट : डॉक्टर की फीस, बेड चार्ज, दवाएं, ऑक्सीजन, वेंटीलेटर, चाय-नाश्ता व खाना-पीना शामिल है।