लद्दाख और उत्तरी सिक्किम में बढ़ी चीनी सैनिकों की आक्रामकता…
भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुई झड़प

भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुई झड़प के बाद से ही दोनों देशों की सीमाओं पर लद्दाख और उत्तरी सिक्किम के कई क्षेत्रों में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। लद्दाख की पेंगोंग त्सो झील के अलावा देमचोक, दौलत बेग ओल्डी और गलवां नदी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में दोनों देशों ने सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है। सूत्रों ने बताया कि पेंगोंग और त्सो झील वाले क्षेत्रों में दोनों ने सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है। इन क्षेत्रों का इस्तेमाल पहले वे गश्त लगाने के लिए ही करते थे। पिछले छह दशक से दोनों देशों के बीच गलवां के आसपास का इलाका विवादित रहा है और 1962 में इसे लेकर दोनों के बीच युद्ध भी हो चुका है। सूत्रों के मुताबिक, चीन ने गलवां घाटी क्षेत्र में तंबुओं की संख्या बढ़ा दी है। इसे देखते हुए भारत ने चौकसी तेज कर दी है।

गौरतलब है कि पेंगोंग त्सो झील क्षेत्र में 5 मई को भारत और चीन के सैनिकों के बीच लोहे की रॉड, डंडे और पत्थरबाजी के जरिये हिंसक झड़प हुई थी। इसमें दोनों ओर के कई सैनिक घायल हुए थे। इसके बाद 9 मई को नाकुला दर्रे के पास भी करीब 150 भारत-चीन सैनिकों के बीच झड़प हुई थी। इसमें दस सैनिक घायल हुए थे। दोनों सेनाओं के बीच बढ़ते इस तनाव पर सेना या विदेश मंत्रालय में से किसी ने बयान नहीं दिया है। पिछले सप्ताह विदेश मंत्रालय ने कहा था कि चीन की सीमा पर शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। 

सूत्रों के मुताबिक, उत्तरी सिक्किम की विवादित सीमा पर भी चीनी सेना की आक्रामकता को देखते हुए अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी गई है। चीन के सरकारी मीडिया ने सोमवार को खबर दी थी कि अक्साई चिन क्षेत्र की गलवां घाटी क्षेत्र में उसके सैनिकों ने सीमा नियंत्रण उपाय मजबूत किए हैं। सरकारी ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने सेना के अज्ञात सूत्रों के हवाले से खबर दी थी कि गलवां घाटी में चीनी क्षेत्र में हाल में भारत द्वारा अवैध रक्षा निर्माण के बाद चीन ने यह कदम उठाया है। वहीं उत्तराखंड में धारचूला को लिपुलेख दर्रे के साथ जोड़ने वाली सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सड़क पर निर्माण को लेकर नेपाल और भारत के बीच बढ़ते सीमा विवाद के बीच दोनों पक्षों के बीच तनातनी की खबर भी आई है। 

लिपुलेख दर्रा कालापानी के पास स्थित है जो नेपाल और भारत के बीच विवादित सीमावर्ती क्षेत्र है। भारत और नेपाल दोनों कालापानी पर अपना दावा करते हैं। भारत में सेना प्रमुख का पदभार ग्रहण करने के बाद उनके नेपाल दौरा करने की परंपरा रही है लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि जनरल एमएम नरवणे नेपाल का दौरा जल्द करेंगे या नहीं। उनसे पहले जनरल बिपिन रावत ने सेना प्रमुख बनने के तीन महीने के भीतर नेपाल का दौरा किया था। इस बीच चीन ने मंगलवार को कहा कि कालापानी भारत और नेपाल का आपसी मसला है। उसने उम्मीद जताई कि दोनों पड़ोसी देश एकतरफा कार्रवाई से बचेंगे और दोस्ताना सलाह-मशविरा से अपने विवादों का उचित समाधान करेंगे।