'कांटे से कांटा' निकालने की तैयारी कर रही है कांग्रेस...

भाजपा के हारे हुए प्रत्याशियों को टिकट दे सकती है कांग्रेस !


भोपाल। मध्य प्रदेश की पूर्ववर्ती कमल नाथ सरकार को गिराने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह के दांव-पेच अपनाएं, ठीक उसी तर्ज पर कांग्रेस राज्य विधानसभा की 24 सीटों के आगामी उपचुनाव में भाजपा को मात देना चाहती है। कांग्रेस के निशाने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं, जिन्हें मात देने के लिए उपचुनाव में कांग्रेस उन भाजपा नेताओं पर दांव लगाना चाहती है जो 2018 के मप्र विस चुनाव में भाजपा के टिकट पर सिंधिया समर्थक तत्कालीन कांग्रेस नेताओं से विधानसभा चुनाव हारे थे।

 ऐसे नेताओं को टिकट देकर कांग्रेस 'कांटे से कांटा' निकालने की तैयारी कर रही है। इसके लिए कांग्रेस के अलग-अलग नेताओं को पिछले चुनाव में पराजित भाजपा नेताओं से बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ग्वालियर सीट से 2018 के विधानसभा चुनाव में वरिष्ठ नेता जयभान सिंह पवैया भाजपा के टिकट पर कांग्रेस प्रत्याशी प्रद्युम्न सिंह तोमर से हार गए थे।

अब 2020 में होने वाले उपचुनाव में पवैया को तोमर का साथ देना होगा। पवैया पर कार्यकर्ताओं का भी दबाव है, पर वे आरएसएस की विचारधारा से जुड़े होने के कारण बागी नहीं होंगे। सूत्रों का कहना है कि इस परिस्थिति को भांपकर कांग्रेस यहां भाजपा के ऐसे बागी की तलाश कर रही है, जिसे भाजपा का परंपरागत वोट भी मिल सके। रायसेन जिले का अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र सांची भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री गौरीशंकर शेजवार की परंपरागत सीट रही है।

2018 के चुनाव में डॉ. शेजवार ने अपने बेटे मुदित शेजवार को यहां से भाजपा का टिकट दिलवाया था। मुदित के खिलाफ कांग्रेस के टिकट पर डॉ. प्रभुराम चौधरी ने चुनाव लड़ा और जीता। अब चौधरी भाजपा के टिकट पर खड़े होंगे।जाहिर है, शेजवार आसानी से चौधरी का समर्थन नहीं करने वाले। कांग्रेस अब मुदित शेजवार पर डोरे डाल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के बेटे और पूर्व मंत्री दीपक जोशी की देवास जिले की हाटपिपल्या सीट भी उनके हाथों से खिसक रही है। जोशी को उनके विरोधी मनोज चौधरी ने कांग्रेस के टिकट पर 2018 में चुनाव हराया था।अब चौधरी विधानसभा से इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ेंगे।

इधर अशोकनगर के पूर्व विधायक जजपाल सिंह जज्जी की जाति को लेकर चल रहे मामले में अब कांग्रेस इसे अदालत में चुनौती देगी। जज्जी पर अलग-अलग जातियों से अलग-अलग चुनाव लड़ने का आरोप है। मध्य प्रदेश के दो विधायकों के निधन और कांग्रेस के 22 बागी विधायकों के इस्तीफे से रिक्त हुई विधानसभा की कुल 24 सीटों पर अब एक साथ उपचुनाव होंगे। प्रदेश के किसी भी विधानसभा के कार्यकाल में इतनी बड़ी तादाद में उपचुनाव नहीं हुए हैं।